यूपी के रामपुर में एक ऐसा सपेरा भी है जो ज़हरीले सांपो को अपना दोस्त बनाकर अपने हुनर से इंसानों का इलाज करता है और उनकी ज़िंदगियां पिछले 65 वर्षों से बचाता आ रहा है। भारत के कुछ खास कबीले और गांवों में सैकड़ों साल तक सांप पकड़कर और सांपों के काटने का इलाज कर लोगों की ज़िंदगी बचाने वाले अपना काम ही है, जिन्हें हम सपेरा भी कहते है। उनका ज्ञान पीढ़ी दर पीढ़ी अनुभव के साथ आगे बढ़ाता चला आ रहा है।


आमतौर पर सपेरों के बच्चे दो साल की उम्र में ही सांपों से खेलना शुरू कर देते हैं और उन्हें अपना दोस्त बना लेते है। बड़े होकर सांपों को पकड़कर उन्हें रिहाशी इलाकों से निकालकर जंगलो में छोड़ते है। साथ ही ज़हरीले सांपों से डसे लोगों की जान बचा कर इंसनियत का काम भी करते हैं।


ज़िहरीले सांपों के काटने का इलाज करते हुए यह शख्‍स पिछले 65 वर्षों से लोगों की ज़िंदगियां बचाकर इंसनियत का काम कर रहा है। इनका नाम मुफाति है, जो उत्तर प्रदेश के रामपुर ज़िले के भोट क्षेत्र के मनकरा गांव में रहते है और सांपों के काटने का इलाज करते चले आ रहे है। साथ ही उनसे दोत्ती कर इंसनीयत का फर्ज भी निभा रहे है।


इंसान और कोबरा जैसे जहरीले सांप साथ-साथ रहते हैं। एक हजार से भी ज्यादा कोबरा सांपों वाले इस इलाके में सपेरे मुफ़ाति नाग व सांप को पकड़ते आये हैं। सपेरे शायद दुनिया के सबसे अनुभवी सांप विशेषज्ञ हैं, लेकिन इनके हुनर की कोई कद्र नहीं जबकि यह लोग अपनी जान जोखिम में डाल कर दूसरों की ज़िंदगियां बचाते है।


मुफ़ाति रामपुर ज़िले के अलावा उत्तरखंड और अन्य ज़िलों में भी लोगो के घर जाकर ज़हरीले सांप पकड़कर उन्हें जंगल में छोड़ते है , साथ ही 65 वर्षों से ज़हरीले सांप के काटे हुए मरीज़ों का भी इलाज करते है। मुफ़ाति कहते है कि यह काम उनके दादा पर दादा से चला आ रहा है। उन्हें सांप काट भी लेता है तो उन्हें असर नहीं होता है। उन्हें अपने पिता से सांप को काबू करने का मंत्र और हुनर सीखा है, जिसे वो हाथ की सफाई भी कहते है।


फ़िलहाल मुफ़ाति किसान भी है और खेती कर के अपना पेट पाल रहे है। हमारी टीम सपेरे मुफ़ाति के जज़्बे और हुनर को सलाम करती है। जो लोगो की ज़िंदगी बचा कर इंसनियत का काम कर रहे हैं।