शहद के फायदों के बारे में आयुर्वेद में बताया गया है। शहद का स्वाद ही ऐसा होता है कि हर उम्र के लोग इसे खाना पसंद करते हैं पर आजकल लोग इसे खरीदते हुए हजार बार उनके मन में यही सवाल आता है कि जो शहद वो घर ला रहे हैं, वो असली है या नकली। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि शहद शरीर के लिए बेहद फायदेमंद है, बशर्ते ये असली हो। दिक्कत तो ये है कि कैसे पहचानें कि जो शहद लाए हैं वो शुद्ध ही है। आज हम आपको ऐसे ही तरीकों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो असली-नकली शहद की पहचान करने में बेहद काम आ सकते हैं।

ऐसे करते हैं पहचान

- शहद की पहचान ये तरीका सालों से लोग आजमाते रहे हैं। गर्म पानी लें, कांच के गिलास या कटोरी में भरें। इसमें एक चम्मच शहद डालें। अगर शहद तुंरत पानी में घुल गया तो मानिए कि वो मिलावटी है। अगर शहद मोटी तार बनाता हुआ तली में जाकर बैठ गया तो असली है।

- मोमबत्ती जलाएं, एक लकड़ी में रूई लपेटकर उस पर शहद लगाएं। शहद लगी रूई को आंच पर रखें। अगर रुई जलने लगे, तो शहद शुद्ध है। अगर जलने में वो समय ले तो समझ लें कि शहद में पानी की मिलावट है।

- टिश्यू पेपर लें, इस पर शहद की एक बूंद डालें। शुद्ध शहद पेपर पर ही जमा रहेगा।

- शुद्ध शहद मोटा होता है। इसकी एक बूंद अंगूठे और उंगली के बीच रखें। तार बनाने की कोशिश करें। असली शहद में मोटी तार बनती है।

- शहद ऊंगली पर लें, असली शहद ऊंगली की नोक पर जमा रहेगा जबकि नकली शहद तुरंत ही फैलना शुरू हो जाएगा।