बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक होली का पर्व आज फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा को मनाया जाएगा। इस बार विशेष योग-संयोगों के साथ होली का पर्व मनाया जाएगा। सोमवार को रंग गुलाल का पर्व धुलंडी मनाया जाएगा। रविवार को दोपहर में 1.52 बजे भद्रा समाप्त हो जाएगी। 

होलिका दहन का शुभ और सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त सूर्यास्त के बाद गोधूली वेला में शाम में 6.38 से लेकर रात में 6.50 बजे तक का रहेगा। होली का प्रदोष काल 2 घंटे 22 मिनट तक रहेगा, जो इस बार शाम 6.38 से रात 9 बजे तक रहेगा। शनि और गुरु मकर राशि में एक साथ विराजमान होंगे। इस बार होली का पर्व सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, वृद्धि योग बन रहा है। 

इसके साथ ही उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र, कन्या का चंद्रमा, कन्या का लग्न भी रहेगा और ध्रुव योग भी बन रहे हैं। शनि और बृहस्पति इस बार होली पर दो सबसे बड़े और अहम ग्रह शनि और देव गुरु बृहस्पति मकर राशि में होंगे। पर्यावरण संरक्षण और गोमाता के संरक्षण के लिए इस बार बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच कई स्थानों पर होलिका दहन में गाय के गोबर से बने गोकाष्ठ का उपयोग किया जाएगा। शहर में हर गली चौराहों पर होलिका दहन किया जाएगा, वहीं मंदिरों में विशेष झांकियां भी सजाई जाएगी।