मेघालय विधानसभा चुनाव में माहबति सीट पर  इस वक्त निर्दलीय उम्मीदवार जुलियस कितबोक दोरफांग का कब्जा है। उन्होंने ये सीट यूडीपी के उम्मीदवार से छीनी थी। इन चुनाव में जुलियस के मुकाबले में आठ उम्मीदवार खड़े हुए हैं, जिसमें 40 करोड़ की संपत्ति के साथ एनपीपी के उम्मीदवार दसाखियातबा लमारे सबसे रईस हैं। वहीं भाजपा ने इस सीट से बानुबुहइंग कमदोह, कांग्रेस ने चाल्र्स मार्गर, एनसीपी ने ताइंगसइलान्ग लपांग, यूडीपी ने दोनबो खाइमदेत, पीडीएफ ने युआमेश साइलयांग, केएचएनएएम ने जचारी सादाफ और एक निर्दलीय उम्मीदवार एवालिनी खारबानी हैं।


बता दें कि इस विधानसभा सीट पर कुल नौ बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। इसमें तीन बार निर्दलीय, दो बार एचपीयू, एक -एक बार एचपीडी-यूडीपी और दो बार कांग्रेस ने ये सीट जीती है। 1972 में जब यहां पहली बार विधानसभा चुनाव हुए तो ये सीट निर्दलीय उम्मीदवार मार्टिन नारायण के खाते में गई। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार सेन रॉय को 645 वोटों से हराया। मार्टिन को 1521 तो वहीं सेन रॉय को 876 वोट मिले। 1978 के चुनाव में मार्टिन ने एक बार फिर सेन को 525 वोट से हरा दिया। इस वक्त मार्टिन को 2412 तो वहीं एचपीडी के टिकट पर लडऩे वाले सेन को 1887 वोट मिले। 1983 के चुनाव में एचडीपी ने अपने उम्मीदवार को बदलकर एसआर मोकसहा को टिकट दिया और उन्होंने इस सीट पर लगातार जीतते आए मार्टिन को 1696 वोटों से करारी शिकस्त दी। मोकसहा को 4216 तो वहीं मार्टिन को 2520 वोट मिले। बता दें कि लगातार दो बार निर्दलीय चुनाव लडऩे वाले मार्टिन ने इस बार पीडीसी का हाथ थामा था।


1988 के चुनाव में भी मुख्य मुकाबला एसआर मोकसहा और मार्टिन मजाव के बीच ही थी। इस बार मार्टिन निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे थे, लेकिन उन्हें एक बार फिर 1003 वोटों से हार मिली। मोकसहा को 3440 तो वहीं मार्टिन को 2547 वोट मिल। वहीं मोकसहा ने इस बार एचपीयू के टिकट से चुनाव लड़ा था। 1993 के चुनाव में मोकसहा से इस सीट से जीत की हैट्रिक लगाते हुए कांग्रेसी उम्मीदवार रेंगक्यानसाई मैकदोह को महज 238 वोट से हरा दिया। मोकसहा को 5013 तो वहीं मैकदोह को 4775 वोट मिले।


1998 के चुनाव में ये सीट कांग्रेस के खाते में चली गई। यहां से कांग्रेसी उम्मीदवार पिंग्वैल ने निर्दलीय उम्मीदवार रंगक्यानसाई मैकदोह को 696 वोट से हरा दिया। पिंग्वैल को 3941 तो वहीं मैकदोह को 3245 वोट मिले। 2003 के चुनाव में भी इस सीट पर कांग्रेस का ही कब्जा रहा। इस बार पिंग्वैल ने यूडीपी के उम्मीदवार एसआर मोकसाह को 751 वोट से हराया। पिंग्वैल को 5021 तो वहीं मोकसाह को 4270 वोट मिले। 2008 में ये सीट यूडीपी के पास गई। यूडीपी के उम्मीदवार डॉनबोक ने कांग्रेसी उम्मीदवार पिग्वैल को जीत ही हैट्रिक लगाने से रोक दिया। डॉनबुक को 6112 तो पिंग्वैल को 5725 वोट मिले। जीत का अंतर 387 वोटों को हरा। वहीं 2013 के चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार जूलियस कितबुक ने यूडीपी के विजेता उम्मीदवार डॉनबुक को 1159 वोट से हरा दिया। जूलियस को 8246 तो वहीं डॉनबुक को 7087 वोट मिले।