देश की ऐतिहासिक कैलाश मानसरोवर यात्रा बुधवार को विधिवत् रूप से सम्पन्न हो गयी। मौसम की खराबी के कारण यात्रा 18 दिन देरी से सम्पन्न हुई। अंतिम 17वां एवं 18वां दल सुबह काठगोदाम से दिल्ली के लिये रवाना हो गया।


इसके साथ ही इस वर्ष की यात्रा पर विराम लग गया है। उत्तराखंड से होकर जाने वाली इस वर्ष की यात्रा में कुल 892 यात्रियों ने कैलाश मानसरोवर के दर्शन किये। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर 18 दल गये हैं। इस वर्ष की कैलाश यात्रा के लिये लगभग 1400 यात्रियों ने पंजीकरण करवाया था।


दिल्ली से 921 यात्री कैलाश दर्शनों के लिये चले लेकिन विभिन्न दलों के 11 यात्री मौसम के कारण आयी रुकावट के कारण यात्रा बीच में ही छोड़कर वापस लौट गये थे। तीन यात्री स्वास्थ्य परीक्षण में असफल रहने से यात्रा पूरी नहीं कर पाये। इस बार की कैलाश मानसरोवर यात्रा में मौसम की खराबी के कारण हेलीकाप्टर उड़ान नहीं भर पाये जिससे यात्रा में कई बार रुकावट आयी।


जिसके कारण विभिन्न दलों के यात्रियों को अलग-अलग पड़ावों पर रुकना पड़ा। यात्रा कई दिनों तक स्थगित रही। यात्रा स्थगित होने के कारण गुंजी एवं पिथौरागढ़ में तो विभिन्न यात्री दलों के यात्रियों को दस-दस दिन तक ठहरना पड़ा। इस प्रकार इस वर्ष की यात्रा में 18 दिनों का विलंब पैदा हुआ। विदेश मंत्रालय की ओर से इस वर्ष यात्रा में पहली बार हवाई सेवा का लाभ दिया गया।


धारचूला से आगे लखनपुर नंजग एवं मालपा के बीच पैदल यात्रा मार्ग क्षतिग्रस्त होने के कारण यात्रा को धारचूला के बजाय पिथौरागढ़ से सीधे गूंजी हेलीकाप्टर से ले जाया गया। विदेश मंत्रालय की ओर से चार एमआई-17 हेलीकाप्टर उपलब्ध कराये गये। नौ सेना के चालीस अधिकारियों की एक टीम गुंजी एवं पिथौरागढ़ में डटी रही। हवाई सेवा का असर इस बार कैलाश मानसरोवर यात्रा में काम करने वाले परंपरागत लोगों पर पड़ा।


हवाई सेवा के कारण पैदल पड़ावों पर काम करनेे वाले लोगों की आर्थिकी प्रभावित हुई। एकमात्र पहला दल धारचूला से आगे मालपा-बूंदी पड़ाव होते हुए आधार शिविर गुंजी पहुंचा। पहले दल के यात्रियों को पैदल मार्ग के क्षतिग्रस्त होने के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इसके बाद विदेश मंत्रालय की ओर से हेलीकाप्टर सेवा का विकल्प उपलब्ध कराना पड़ा।


कुमाऊं मंडल विकास निगम के महाप्रबंधक टीएस मर्तोलिया ने बताया कि अंतिम दल के 49 यात्री आज काठगोदाम से दिल्ली के लिये रवाना हो गये हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष यात्रा पूरी तरह से सफल रही। बता दें कि इस बार श्रद्धालु सिक्किम के नाथुला से भी पवित्र मानसरोवर यात्रा पर गए थे।