महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता सचिन सावंत ने मस्जिदों में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) पार्टी की आलोचना करते हुए गुरुवार को कहा कि इससे हिंदुओं को ज्यादा नुकसान होगा क्योंकि 2,404 मंदिरों को भी अपने वाद्यों को बंद करना होगा। 

सावंत ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि मुसलमानों द्वारा अजान को रोक दिया गया है, लेकिन ‘काकड़’ आरती भी बंद हो गई है जो यह दर्शाता है कि मनसे की चाल दोनों को बाधित कर रही है। उन्होंने कहा, मुंबई में कुल 2,404 मंदिर और 1,144 मस्जिद हैं। लाउडस्पीकर के उपयोग की बुधवार तक इनमें से केवल 20 मंदिरों और 922 मस्जिदों को अनुमति थी। पांच मंदिरों और 15 मस्जिदों के आवेदन लंबित थे। यदि हम मनसे की बात मानते हैं तो मस्जिदों के साथ-साथ 2400 से ज्यादा मंदिरों में लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नहीं हो सकेगा। 

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उन्होंने कहा कि त्र्यंबकेश्वर और शिरडी में काकड़ आरती भी बंद हो गई है। यह किसका पाप है? उन्होंने कहा, मनसे का राजनीतिक रूप से स्वार्थी रुख प्रगतिशील महाराष्ट्र के लिए हानिकारक है। भारतीय जनता पार्टी शासित राज्यों ने लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया है, इसका कारण भी बिल्कुल स्पष्ट है। इस बीच औरंगाबाद पुलिस ने कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने के आरोप में ठाकरे के खिलाफ मामला दर्ज किया है। महाराष्ट्र में शिरडी, श्रीरामपुर, परभणी, उस्मानाबाद, हिंगोली, जालना के कुछ हिस्सों तथा नांदेड़, नंदुरबार सहित राज्य के कई जगहों पर अजान के दौरान लाउडस्पीकर बंद रहे। राज्य भर में लगभग 250-260 मनसे कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है। 

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ईद की पूर्व संध्या पर मनसे प्रमुख ने जोर देकर कहा था कि लाउडस्पीकर का मुद्दा ‘महज एक दिन का मुद्दा नहीं है।’ ठाकरे के उस भाषण के कारण पुलिस को कार्रवाई करने के लिए मजबूर किया जिसमें उन्होंने कहा था, अगर मस्जिदें दिशानिर्देशों का पालन नहीं करती हैं, तो हनुमान चालीसा दोगुने स्वर में बजायी जाएगी। छात्रों और बीमार लोगों को लाउडस्पीकर के कारण परेशानी होती है। क्या आपका धर्म लोगों से बड़ा है?