नागरिकता विधेयक पास नही होने के कारण भारत में गैर मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान नहीं किया जा सका, जिसके कारण उन्हें अब अपने देश वापस जाना होगा। आप को बता दे की बंग्लादेश एवं कई अन्य देशों से प्रताड़ित होकर या फिर उसके भय से अपने-अपने देश छोड़कर भागें लाखों हिंदू लोग असम तथा अन्य जगहों पर में शरण लिए हुए है।   


वहीं हिंयुछाप संगठन ने कहा कि असम तथा भारत के अन्य हिस्सों में आकर आश्रय लेने वाले हिंदू बंग्लादेशियों को नागरिकता के बजाय अस्त्र का प्रशिक्षण देकर उन्हें बांग्लादेश भेजने की सिफारिश हिंदू युवा छात्र परिषद ने की है। यही मांग दोहराई थी हिंदू बंगाली के नेता सुकुमार विश्वास ने भी। आज एक संवाददाता सम्मेलन में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए परिषद की केंद्रीय समिति के अध्यक्ष बोलेन वैश्य ने कहा कि पलायनवादी विचारधारा के कारण मुसलमानों के अत्याचार से हिंदुओं को बांग्लादेश से भागना पड़ा।


भारत हमेशा के लिए भगोडे़ हिंदूओं का धर्मशाला नहीं बन सकता। इसलिए बांग्लादेश से आए हिंदुओं को नागरिकता प्रदान करने के बजाय उन्हें पर्याप्त प्रशिक्षण देकर बंग्लादेश भेज देना चाहिए और वहां बांग्लादेशी मुसलमानों के विरूद्ध लड़कर जिंदा रहने के लिए प्रेरित करना चाहिए। संगठन द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि वहां के लोगों तथा बांग्लादेश की सेना के साथ युद्ध करके उस देश का बंटवारा कर गैर इस्लामिक बांग्लादेशियों के लिए नए राष्ट्र का निर्माण करे।


इस कार्य में भारतीय सेना की भी मदद लेनी चाहिए। विज्ञप्ति में कहा गया है कि अगर भारत सरकार एेसी योजना बनाती है तो हिंदू युवा छात्र परिषद के नेतृत्व में सैकड़ों हिंदू स्वयंसेवी के रूप में उक्त योजना में शामिल होंगे। सम्मेलन में हिंदू युवा छात्र परिषद के प्रदेश अध्यक्ष बलेन वैश्य, उपाध्यक्ष दीपांकार दास, वित्त सचिव विकास बरदलै, मुख्य सांगठिक सचिव निवनय नाथ सहित नलबाड़ी जिला अध्यक्ष दिलीप मजुमदार और सचिव राकेश दे सहित कार्यकर्ता उपस्थित थे।