असम में राष्ट्रीय ऩागरिक पंजी (एनअारसी) मसौदे के अंतिम प्रकाशन पर रह गई विभिन्न विसंगतियों की वजह से लोगों को हो रही परेशानियों ने अधिकांश हिंदीभाषी संगठनों को एकजुट कर दिया। मंगलवार को 32 संगठनों की हिंदुस्तानी केंद्रीय विद्यालय के सभागार में अायोजित बैठक में एनअारसी में नाम शामिल करवाने से वंचित भारतीय नागरिकों के लिए सामाजिक पहल और कानूनी लड़ाई लड़ने का संकल्प किया ।

बैठक में इस बात को महसूस किया गया कि हिंदीभाषियों के साथ असमियां, बंगाली, नेपाली और चाय जनजाति समुदायों के काफी लोगों के साथ नाम भी  एनआरसी के मसौदा मे शामिल नहीं हुए हैं। इसलिए सभी संगठन मिलकर सभी समुदायों के हित में काम करेंगे।

एनअारसी में नाम शामिल करवाने के लिए सभी संगठन लोगों को मदद करेगी एंव कानूनी लड़ाई भी लड़ेगी, इसके लिए एक समन्वय समिति का गठन किया गया है। बैठक की अध्यक्षता हिंदुस्तानी सम्मेलन के अध्यक्ष चंद्रकांत जयसवाल ने की। इस सभा में एनआरसी के अंतिम मसौदे में बड़ी संख्या में हिंदीभाषियों के नाम दर्ज नही होने के मसले पर गहनता और गंभीरता के साथ चर्चा की गई।

सभी वक्ताओं ने एक शुद्ध एनअारसी की वकालत करते हुए यह सुनिश्चित करने को कहा कि एक भी भारतीय का नाम इसमें शामिल होने से नही छूटना चाहिए। इस सभा में ढ़ेकियाजुली के विधायक अशोक सिंघल, तिनसुकिया के विधायक संजय केसान, दुलियाजन के विधायक तेरेस ग्वाला और पूर्व बिलासीपाड़ा के विधायक अशोक कुमार सिंधी ने भी शिरकत की।

वरिष्ठ भाजपा नेता विजय कुमार गुप्ता के संचालन में संपन्न हुआ। इस सभा के दौरान बड़ी बड़ी हस्तियों के साथ क्षेत्रिय समाचार पत्र के संपाद ने भी अपने विचार व्यक्त किए। जबकि सम्मेलन के महामंत्री एसपी राय ने एनआरसी, उच्चतम न्यायालय और इससे जुड़ी कानूनी पहलुओं पर प्रकाश ड़ाला।

वक्ताओं ने एनआरसी से जुड़ी समस्याओं को गंभीर एंव जटिल बताते हुए कहा कि बिना सामूहिक पहल के इसका समाधान मुश्किल है। उन्होंने कहा कि जिनके नाम छूट गए है वे जरूर दावा करें और उन्होंने कहा कि सभी हिंदीभाषी संगठनों को एकजुट होकर सरकार पर एनआरसी के तीसरा मसौदा निकाले जाने के लिए दबाव बनाने की बात कही।

बैठक में एक समन्वय समिति सहित कई उप-समितियां बनाने, जिला स्तर पर सहायता केंद्र खोले जाने, हिंदी भाषी राज्यों के मुख्यमंत्री समेत अन्य राजनेताओं से मिलने, राष्ट्रपती-प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री राज्यपाल-मुख्यमंत्री आदि से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपने जैसे निर्णय लिए गए।