राज्यसभा सदस्य विश्वजीत दैमारी ने बुधवार को कहा की असम में जारी राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एआरसी ) अध्दतन प्रक्रिया को लेकर हिंदीभाषियों को चिंता करने की जरूरत नहीं है । क्योंकि,असम में आकर बसे हिंदीभाषी भारतीय ही हैं। 

इसमें कोई शक नहीं है। असम के स्थानीय मुल निवासी तमाम लोग एंव परिवारों के नाम भी एऩआरसी के अंतिम मसौदे में शामिल नहीं हुए हैं। इसका कतई यह मतलब नहीं  कि ये लोग विदेशी हैं या इनको असम से खदेड़ा जाएगा।

बुधवार को यहां संवादाताओं से हुई भेंट में जब उनसे पुछा गया कि राज्य में बसे हिंदीभाषी परिवारों के नाम एनआरसी के अंतिम मसौदे में नहीं आए हैं। उनका क्या होगा ,तो उन्हेंने कहा कि इसमें इतनी चिंता की कोई जरूरत नहीं है । दरअसल एऩआरसी अध्दतन प्रक्रिया असम में ही जारी है।

दूसरे राज्यों में एनआरसी का काम नही हो रहा है। इसके अलावा अन्य कुछ राज्यों से मंगवाए गए दस्तावेजों की भाषा हिंदी और उर्दू  मे होने के काऱण एनआरसी अध्दतन प्रकरि्या से जुड़े अधिकारी  या पढ़ नही पाते है अथवा समझ नही पाते हैं। 

इन सब कारणों से भी असम में बसे कई हिंदीभाषी परिवार के सदस्यों के नाम शामिल नही हुए हैं। उन्होंने कहा कि एक व्यकि्त अपने जीवनकाल में देश के एक हिस्से से दुसरे हिस्से में चला जाता है। एेसे में उस व्यकि्त का लिगेसी डाटा ही एकमात्र एेसा दस्तावेज है जो कि उसकी पहचान कि पुष्टि करता है।

श्री दैमारी ने कहा कि एनआरसी के अंतिम मसौदे से रद्द हुए लोगों खासकर  भारतीय  नागरिकों को इसकों लेकर चिंतित होने की जरूरत ही नहीं है । उनके नाम शामिल नही होनें की वजहों को एनआरसी प्राधिकरण को  तो बताना  ही होगा।

उन्होंने उम्मीद जताई कि अन्य राज्यों से मांगे गए सभी दस्तावेजों के आनें के बाद दिसंबर के भीतर छुटे सभी  भारतीय नागरिकों के नाम एनआरसी में शामिल हो जाएंगे । उन्होनें कहा कि सर्वोच्च न्यायालय और एनआरसी के बीच जारी यह प्रक्रिया संपन्न होने के बाद तो अंतिम फैसला फिर सरकार को ही लेना होगा।