कृषक मुक्ति संग्राम समिति (केएमएसएस) के संयोजक अखिल गोगोई ने गुरुवार को भाजपा नेता व वित्त मंत्री डॉ हिमंत बिस्वा सरमा को असम का पहला और प्रमुख माफिया राजनीतिक करार दिया है। गुवाहाटी स्थित केएमएसएस मुख्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए अखिल ने सरमा की जमकर आलोचना की। हिमंत को विष नहीं सदैव अमृत का पान करने वाला बताया। इसके अलावा भी डॉ हिमंत के शैक्षणिक जीवन से लेकर राजनीतिक जीवन के विभिन्न उतार-चढ़ाव पर कटाक्ष करते हुए कई तरह के गंभीर आरोप लगाए हैं।

भ्रष्टाचार से बचने के लिए सरमा भाजपा में हुए थे शामिल
अखिल ने कहा कि 1985 में कांग्रेस द्वारा असम समझौते का विरोध किए जाने की बात मंत्री डॉ हिमंत ने कही है, लेकिन मैंने कभी भी विरोध होते नहीं देखा। इतना ही नहीं अखिल ने हिमंत को आसू द्वारा संगठन से बाहर किये जाने की भी बात कही। उन्होंने कहा कि पेयजल योजना लुईस बर्जर व शारदा भ्रष्टाचार से बचने के लिए ही सरमा भाजपा में शामिल हुए हैं। ऐसे भ्रष्टाचारी नेता वर्तमान समय में अपने आप को महादेव घोषित कर रहे हैं।

आसू और एजीपी भी अपनी स्थिति स्पष्ट करे
उन्होंने कहा कि असम समझौते के आर्टिकल नंबर छह को क्रियान्वित करने के पीछे की मुख्य वजह नागरिकता संशोधन विधेयक को लागू कराने से उपजे असंतोष को दबाना है। सरमा ने भाजपा के विजल विजन डॉक्यूमेंट को जारी करते हुए चुनाव से पूर्व कहा था कि इसे पूरी तरह से क्रियान्वित किया जाएगा। ऐसे में विजन डॉक्यूमेंट में असम समझौते को क्रियान्वित करने की बात भाजपा ने कही है, लेकिन उसे लागू नहीं किया गया। अखिल ने इस मामले में आसू और असम गण परिषद से भी अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा।

पूरे विश्व से हिंदुआें को भारत लाना चाहती है भाजपा
उन्होंने कहा कि सिलचर की एक सभा में डॉ हिमंत ने कहा था कि कोई भी हिंदू भारत में विदेशी नहीं हो सकता है। जबकि भाजपा नागरिकता संशोधन विधेयक को सर्व भारतीय बताती है। वहीं केंद्रीय गृह मंत्री कहते हैं कि विदेशियों का बोझ अकेले असम को नहीं लेना होगा। भाजपा पूरे विश्व से हिंदुओं को भारत में लाने की बात कहती है। ऐसे में भाजपा की दोहरी नीति राज्य वासियों के सामने उजागर हुई है। केएमएसएस नेता ने कहा कि गत पांच वर्षों में भाजपा सरकार ने विकास का कोई काम नहीं किया है। वर्तमान समय में भाजपा के लिए विकास कोई मुद्दा नहीं रह गया है। उसका मुख्य मुद्दा केवल हिंदुत्व पर केंद्रित हो गया है। हिंदुत्व के लिए ही राम मंदिर के मुद्दे को लाया गया है।

सोनाेवाल आैर हिमतं को अखिल की चुनाैती
अखिल ने कहा कि सरमा के द्वारा 17 विधानसभा क्षेत्रों को मुसलमानों के हाथों में जाने की बात पूरी तरह से हास्यास्पद है। अखिल ने सवालिया लहजे में कहा कि बराक के सोनाई, बरखोला, उदारबंद जैसे विधानसभा क्षेत्रों में किसी भी समय असमिया की जीत नहीं हुई है। इसके साथ ही अखिल ने मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल और डॉ हिमंत बिस्वा सरमा को इन विधानसभा क्षेत्रों से असमिया को जिताकर लाने की चुनौती दी। अखिल ने आगे कहा कि सांप्रदायिक और मौलवाद के लिए जान-बूझकर नागरिकता संशोधन विधेयक को लाया गया है। 1971 से लेकर अब तक असम में बांग्लादेशियों की संख्या 20 लाख बढ़ी है।

सांप्रदायिकता को बढ़ावा देती है भाजपा
जबकि हिमंत कहते हैं कि आठ लाख लोग ही नागरिकता पाएंगे। यह पूरी तरह से हास्यास्पद है। अखिल पर राज्य के सत्रों पर अवैध कब्जे को लेकर कुछ नहीं बोलने के आरोप लगते रहे हैं। इस संदर्भ में अखिल ने कहा कि मोइनाबाड़ी सत्र (मठ) मुसलमानों के कारण सरभोग में स्थानांतरित नहीं हुआ है। इसके पीछे ब्रह्मपुत्र नद में हुआ भारी कटाव है। वर्तमान में सत्र भाजपा के लिए सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने वाला एक मुद्दा बन गया है। फिलहाल, अखिल पर मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगता है। कारण अखिल कभी भी बांग्लादेशी मुसलमानों के संदर्भ में नहीं बोलते हैं। जब कभी अवैध घुसपैठियों की बात होती है तो सबसे पहली कतार में समर्थन में अखिल ही नजर आते हैं।