आजादी के बाद देश के 11 हिमालयी राज्य अपनी साझा समस्याओं, सांस्कृतिक विरासत, पर्यावरणीय महत्व और विशिष्ट भौगोलिक परिवेश की पृष्ठभूमि में विकास की दौड़ में पिछड़ेपन के ठप्पे से उबरने के लिए मसूरी में हिमालयन कॉन्क्लेव में एकजुट होंगे। मसूरी में इन राज्यों की ओर से पहली दफा संयुक्त मसौदा तैयार किया जा रहा है।

इसे केंद्र सरकार के साथ ही 15वें वित्त आयोग और नीति आयोग के सुपुर्द किया जाएगा। नीति आयोग हिमालयी राज्यों के लिए अलग प्रकोष्ठ गठित कर चुका है। ऐसे में इस मसौदे को हिमालयी राज्यों के लिए पृथक नीति नियोजन की जरूरत की पैरवी की दिशा में भी अहम कदम माना जा रहा है। कॉन्क्लेव की मेजबानी कर रहे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शनिवार को मसूरी में आयोजन स्थल का मुआयना कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। कॉन्क्लेव में हिस्सा लेने पहुंचे हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मसूरी में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से शिष्टाचार भेंट भी की। 

हिमालयी राज्यों के सामने कई चुनौतियां हैं। इनमें सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण में भागीदारी के मद्देनजर ग्रीन बोनस, पर्यटन एवं वेलनेस, आपदा प्रबंधन, पलायन आदि मुद्दों पर इस कॉन्क्लेव में चर्चा होगी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि कॉन्क्लेव में हिमालयी राज्यों से जुड़े विभिन्न मुद्दों और कॉमन एजेंडे पर व्यापक चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि भारत की अधिकतर नदियों का स्रोत हिमालय है। इसलिए प्रधानमंत्री के जल संचय अभियान में हिमालयी राज्यों की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है। जल संरक्षण में राज्य किसतरह सहयोग कर सकते हैं, इस पर भी मंथन होगा। कॉन्क्लेव में पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज धन्यवाद ज्ञापित करेंगे।

हिमालयन कॉन्क्लेव में भाग ले रही हस्तियों में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, मुख्यमंत्रियों में हिमाचल के जयराम ठाकुर, मेघालय के केसी संगमा, नागालैंड के नेफ्यू रियो, अरुणाचल प्रदेश के उप मुख्यमंत्री चौना मेन, मिजोरम के मंत्री टीजे लालनंत्लुआंगाए, त्रिपुरा के मंत्री मनोज कांति देब, सिक्किम के मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ महेंद्र पी लामा, जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल के सलाहकार केके शर्मा, नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ राजीव कुमार, केंद्रीय जल व स्वच्छता सचिव परमेश्वर अय्यर, एनडीएमएमए सदस्य कमल किशोर, भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के प्रोफेसर डॉ मधु वर्मा शामिल हैं। बता दें कि इस सम्मेलन में उत्तराखंड, हिमाचल, मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा, मिजोरम, अरुणाचल, असम, नागालैंड, सिक्किम व जम्मू-कश्मीर के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।