शिमला। हिमाचल प्रदेश के तकनीकी शिक्षा, सूचना एवं प्रौद्योगिकी और जनजातीय विकास मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश पहला राज्य है जिसने ड्रोन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए पॉलिसी बनाई है। मारकंडा ने आज यहां पत्रकार वार्ता में कहा कि मेडिकल और अन्य क्षेत्र में भी ड्रोन का इस्तेमाल करने पर ट्रायल किए गए हैं। तकनीकी शिक्षा विभाग ने सरकारी आईटीआई शाहपुर में ड्रोन प्रशिक्षण के लिए पहला ड्रोन स्कूल स्थापित किया गया है। इसके लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी के साथ एमओयू साइन किया है। उन्होंने कहा कि शिमला के जुब्बल में सेब के बागीचों में भी स्प्रे के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। 

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इस दौरान 2 बीघा तक के बागीचे में तीन मिनट में स्प्रे की गई। जबकि पारंपरिक तरीके से इसमें 30 मिनट तक लग जाते हैं। डॉ. मारकंडा ने कहा कि जयराम सरकार तकनीकी शिक्षा के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को स्वावलंबी बना रही है। हमारी सरकार में शिक्षा और तकनीकी शिक्षा के लिए बजट में वृद्धि की गई। बजट को 16 प्रतिशत बढ़ाकर आठ हजार 669 करोड़ रुपये कर दिया गया। प्रदेश सरकार ने इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग सेंटर्स को बढ़ावा दिया है। वर्तमान में प्रदेश में तकनीकी शिक्षा विभाग के अंतर्गत कुल 363 तकनीकी शिक्षा और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान क्रियाशील हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत नामांकित छात्रों की संख्या एक लाख 44 हजार 258 है और प्रशिक्षित छात्र एक लाख 35 हजार 187 है। साथ ही 61 आईटीआई में शोर्ट टर्म ट्रेनिंग कोर्स चलाए जा रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि अब तक 50 आईटीआई को अपग्रेड किया गया। आईटीआई में महिलाओं के लिए ड्राइविंग स्कूल खोले गए और उन्हें निशुल्क प्रशिक्षण दिया गया। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने प्रदेश में 26 नई आईटीआई शुरू कीं और जिला मंडी के करसोग और सराज, कांगड़ा के जंदौर और सुलह और जिला कुल्लू के दलाश में बहुतकनीकी संस्थान खोलने को मंजूरी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जनजातीय समुदाय की जनसंख्या, कुल जनसंख्या का 5.71 प्रतिशत है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्गों ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति विकास निगम से जो कर्ज लिया है, उनके लिए वन टाइम सेटलमेंट का प्रावधान किया जाएगा। इससे 12000 लोगों की 12 करोड़ रुपये की ब्याज और जुर्माना राशि सेटल की जाएगी। 

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उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्र के लिए टेलीमेडिसिन प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई। इससे यहां की जनता को स्वास्थ्य लाभ मिले हैं। साथ ही जनजातीय क्षेत्र के लिए अटल टनल का निर्माण किया गया जो आज जनजातीय लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि जयराम सरकार के अब तक के कार्यकाल के दौरान जनजातीय क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया है। एफआरए के तहत जनजातीय क्षेत्र के लोगों को खेती के लिए भूमि प्रदान की जा रही है। डॉ. मारकंडा ने कहा कि प्रदेश सरकार ने जनजातीय उप-योजना के तहत जनजातीय क्षेत्रों के लिए 2018-19 से लेकर 2022-23 के लिए तीन हजार 619 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। जनजातीय उप-योजना के अंतर्गत परिवहन, सड़कों-पुलों और भवन निर्माण के लिए 2018-19 से लेकर 2022-23 तक के लिए कुल एक हजार करोड़ से अधिक बजट का प्रावधान किया गया। उन्होंने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट के तहत दो हजार 833 करोड़ के 14 एमओयू साइन किए गए थे। इनमें से दो हजार 89 करोड़ के चार एमओयू क्रियान्वित हो चुके हैं।