एथलेटिक्स ट्रैक इवेंट में देश को पहली बार गोल्ड दिलाकर इतिहास रचने वाली हिमा दास की कहानी किसी फिल्मी स्टोरी से कम नहीं है। 18 साल की हिमा ने महज दो साल पहले ही रेसिंग ट्रैक पर कदम रखा था। उससे पहले उन्हें अच्छे जूते भी नसीब नहीं थे। आज उन्होंने आईएएएफ विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में महिलाओं की 400 मीटर रेस में स्वर्ण पदक हासिल कर इतिहास रच दिया है।

फिनलैँड में गोल्ड मेडल जीतने के बाद खुशी से उछलती हिमा दास ने असम के उनींदे से गांव धींग में अपने पिता को फोन करके कहा कि दउता मैंने दुनिया हिला दी और आप लोग सो रहे हो। बता दें कि  हिमा असम के नागांव जिले के एक छोटे से गांव कंधुलीमारी धींग में पैदा हुई। रंजीत दास और जोनाली दास की बेटी हिमा की परवरिश 16 सदस्यों के संयुक्त परिवार में हुई। धींग के एक निम्न मध्यम वर्ग परिवार की इस बेटी का फिनलैँड तक का सफर बहुत आसान नहीं रहा। वह एक साधारण किसान परिवार से आती है जहां खेल की दुनिया में करियर बनाने का सपना देखना उनकी हैसियत से बाहर की बात मानी जाती थी, लेकिन हिमा ने सपने देखना नहीं छोड़ा और आखिर में उसके सपने साकार हुए, उसकी कड़ी मेहनत रंग लाई।

बता दें कि हिमा ने कभी भी एथलेटिक्स में किस्मत आजमाने का सोचा नहीं था, वह तो लड़कों के साथ फुटबॉल खेला करती थीं। इस दौरान एक शख्स ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उसकी जिद की वजह से वह ट्रैक पर उतर आईं और कड़ी मेहनत के बाद इतिहास रचने में कामयाब हुईं। दरअसल, वो शख्स कोई और नहीं उनके कोच निपोन दास हैं। उन्होंने हिमा को एथलेटिक्स में किस्मत आजमाने की सलाह दी, लेकिन उनके परिवार वाले राजी नहीं हुए। आखिरकर कोच निपोन की जिद के आगे हिमा के परिजनों का झुकना पड़ा। इसके बाद हिमा ट्रैक पर अपनी काबिलियत साबित करने की जोर आजमाइश में जुट गईं।

गोल्ड मेडल जीतने के बाद हिमा की मां ने कहा, हम बहुत खुश हैं। हमें उस पर बहुत गर्व है। मैं भगवान से प्रार्थना करूंगी कि वे उसे जीवन में और कामयाब बनाएं ताकि वह भविष्य में भी हमें और असम को उस पर गर्व करने का अवसर दे। हिमा की एक रिश्ते की बहन कहती हैं, हिमा ने सिर्फ धींग का ही नहीं बल्कि असम और पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।

बता दें कि विश्व जूनियर चैंपियनशिप में इससे पहले भारत के लिये सीमा पुनिया ने वर्ष 2002 में डिस्कस थ्रो में कांस्य पदक और वर्ष 2014 में नवजीत कौर ढिल्लन ने डिस्कस में ही कांस्य पदक के रूप में भारत के लिएपदक जीते थे, लेकिन 18 वर्षीय हीमा ने ट्रैक स्वर्ण के साथ महिला एथलेटिक्स में भारत के लिये स्वर्ण का सूखा भी समाप्त कर दिया है। महिलाओं की 400 मीटर फाइनल रेस में रोमानिया की आंद्रिया मिकलोस ने 52.07 सेकंड का समय लेकर रजत पदक और अमेरिका की टाइलर मानसन ने 52.28 सेकंड कस समय लेकर कांस्य पदक जीता। भारतीय युवा धाविका ने शुरूआत से ही टूर्नामेंट में खुद को पदक का दावेदार दिखाया और शुरूआती राउंड में चौथी हीट में 52.25 सेकंड का सर्वश्रेष्ठ समय निकालकर हीट की विजेता रहीं। उन्होंने सेमीफाइनल में 52.10 सेकंड का समय लिया और इस वर्ग में भी शीर्ष पर रहीं। रेस में अन्य भारतीय धाविका जिस्ना मैथ्यू ने शुरूआत में अच्छा प्रदर्शन किया और पांचवीं हीट में 54.32 सेकंड का समय लेकर विजयी रहीं। लेकिन केरल की जिस्ना सेमीफाइनल में पिछड़कर बाहर हो गयीं जहां वह 53.86 सेकंड का समय लेकर पांचवें नंबर पर रहीं।