दो हफ्ते में तीसरे गोल्ड मेडल का खिताब जीतने वाली कोई और नहीं बल्कि भारत की गोल्डन गर्ल हिमा दास हैं। जी हां भारत की इस शीर्ष महिला धावक हिमा दास ने दो सप्ताह के भीतर तीसरा स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया है। हिमा ने यहां क्लांदो मेमोरियल एथलेटिक्स प्रतियोगिता में महिलाओं की 200 मीटर स्पर्धा का स्वर्ण पदक अपने नाम किया। भारतीय धावक ने इस रेस को 23.43 सेकेंड में पूरा किया और पहले पायदान पर रही। आइए विस्तार से जानते हैं उनके इस गोल्डन सफर के बारे में....

हिमा ने 2 जुलाई को साल की अपनी पहली प्रतिस्पर्धा 200 मीटर रेस में 23.65 सेकेंड का समय निकालर सोना जीता था। यह रेस पोलैंड में हुई पोजनान एथलेटिक्स ग्रांड प्रिक्स के तहत हुई थी। इसके बाद, विश्व जूनियर चैंपियन और 400 मीटर में राष्ट्रीय रिकॉर्डधारक हिमा ने 8 जुलाई को पोलैंड में हुए कुंटो एथलेटिक्स टूर्नामेंट में 200 मीटर की रेस में 23.97 सेकेंड के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। आपको बता दें कि वर्ल्ड जूनियर चैम्पियन हिमा का सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत समय 23.10 सेकेंड है, जो उन्होंने पिछले साल बनाया था। बता दें कि हिमा पिछले कुछ महीनों से पीठ दर्द से परेशान रही थी और इस दर्द के बाद उन्होंने फिर से दमदार वापसी की है।


हिमा दास का जन्म 9 जनवरी 2000 को असम राज्य के नगांव जिले के ढिंग में हुआ था। हिमा के पिता रोंजित दास किसानी करते हैं, जबकि माताजी जोमाली दास गृहिणी हैं। कुल 16 सदस्यों के घर में आर्थिक हालात शुरू से ही खराब रहे। बस किसी तरह खाने-पीने की व्यवस्था हो जाती है। परिवार में हिमा और उनके माता-पिता के अलावा 5 भाई और बहन हैं। हिमा ने अपनी शुरुआती पढाई गांव से ही की। खेलों में रुचि होने और पैसों की तंगी के चलते हिमा अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख सकीं।

हिमा के एथलीट बनने की कहानी भी थोड़ी फिल्मी है। वो क्या हैं जब 2017 में हिमा गुवाहाटी में एक कैम्प में हिस्सा लेने आई थीं तब उनकी मुलाकात एक एथलेटिक्स के कोच से हुई। उन्होंने हिमा के अन्दर वो सारे गुण भाप लिए जो देश को एक नया एथलीट देने वाला था। बस फिर क्या था उन्होंने हिमा को एथलीट के गुर सिखाये। फिर बारी आई ट्रेनिंग के लिए गुवाहाटी भेजने की लेकिन हिमा के माता-पिता इतने सक्षम नहीं थे, ऐसे में हिमा के वहां रहने खाने का खर्चा उनके कोच ने ही उठाया।