प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अफगानिस्तान में निरंतर बदल रही स्थिति में भारत की प्राथमिकताओं पर ध्यान केन्द्रीत करने के लिए एक उच्च स्तरीय समूह का गठन किया है जिसमें विदेश मंत्री डा एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।  

अफगानिस्तान में पिछले वर्षों में भारत द्वारा किये गये निवेश और अनेक परियोजनाओं के मद्देनजर भारत के हित अफगानिस्तान से काफी गहरे जुड़े हुए हैं। इसलिए इसे काफी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार इस समूह का गठन अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद बदलते हालातों के मद्देनजर भारत की नीति और दृष्टिकोण के अनुसार रणनीति बनाने के लिए किया गया है। इस समूह का कार्य अफगानिस्तान के हर रोज के घटनाक्रम और उसके भारत पर असर पर नजर रखने का है। 

यह समूह पिछले कुछ दिनों से नियमित तौर पर बैठक कर रहा है। अभी अफगानिस्तान के संदर्भ में भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकता वहां से लोगों की सुरक्षित वापसी तथा अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर है। इसके साथ ही इस बारे में भी रणनीति बनानी है कि आने वाले समय में अफगानिस्तान की जमीन से भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधि न संचालित की जायें। इस बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अगस्त माह में भारत की अध्यक्षता के समापन सत्र में अफगानिस्तान से लोगों की सुरक्षित वापसी और आतंकवाद से मिलकर मुकाबला करने तथा वहां अल्पसंख्यकों की रक्षा के संबंध में एक प्रस्ताव भी पारित किया है। 

सरकार ने विपक्षी दलों को भी अफगानिस्तान के मुद्दे पर विश्वास में लेने की कवायद के तहत उन्हें अफगानिस्तान की स्थिति पर विस्तार से जानकारी दी है। विदेश मंत्री डा एस जयशंकर ने करीब सभी विपक्षी दलों के संसदीय नेताओं की संसदीय सौंध में पिछले सप्ताह हुई बैठक में इस बारे में सभी पहलुओं से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वहां फंसे भारतीयों को वापस लाना अभी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। भारत ने अफगानिस्तान से पिछले सप्ताहों के दौरान छह उडान संचालित की जिनमें भारतीय नागरिकों सहित 550 से अधिक लोगों को वापस लाया गया।