चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ बयान को लेकर आम आदमी पार्टी(आप) के संस्थापक सदस्यों में से एक कुमार विश्वास को बड़ी राहत देते हुए रोपड़ में दर्ज मामले में किसी भी प्रकार की कार्रवाई और उनकी गिरफ्तारी पर सोमवार को रोक लगा दी। 

कवि पर आरोप है कि उन्होंने केजरीवाल पर खालिस्तान से संबंध होने के आरोप लगाए थे। उच्च न्यायालय ने आज यहां अंतरिम आदेश सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ यह प्राथमिकी राजनीति से प्रेरित लगती है। जहां लगे कि कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग किया जा रहा है वहां उच्च न्यायालय का दखल बेहद जरूरी हो जाता है। अदालत ने कहा कि प्राथमिक तौर पर कुमार विश्वास के खिलाफ मामला नहीं बनता है। कुमार विश्वास ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करके कहा था, 'दिल्ली के मुख्यमंत्री को लेकर दिए गए बयान के चलते 12 अप्रैल को रोपड़ में दर्ज की गई यह एफआईआर कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन करके दर्ज की गई है।'

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कुमार विश्वास ने कहा कि उनके खिलाफ यह प्राथमिकी रोपड़ में दर्ज की गई, जबकि उन्होंने इंटरव्यू मुंबई में दिया था। इसके साथ ही यह भी बताया कि इस मामले में बिना किसी जांच जल्दबाजी में प्राथमिकी दर्ज की गई है। बारह अप्रैल को दर्ज इस प्राथमिकी की कॉपी 10 दिन बाद 22 अप्रैल दोपहर तीन बजे उन्हें दी गई। याची ने कहा कि यह प्राथमिकी उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन है। इस प्रकार दर्ज की गई प्राथमिकी साफ तौर पर राजनीतिक रंजिश का नतीजा है। 

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कुमार विश्वास ने पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले केजरीवाल पर अलगाववादियों का समर्थन करने का आरोप लगाया था। पंजाब में रूपनगर के सदर थाने में 12 अप्रैल को उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। पंजाब पुलिस 20 अप्रैल को गाजियाबाद स्थित कुमार विश्वास के घर पहुंची थी और उन्हें पूछताछ के लिए तलब किया था। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि जब वह लोगों की शिकायतों के निवारण के लिए 'आप' समर्थकों के साथ गांवों में घूम रहे थे, तो कुछ अज्ञात नकाबपोशों ने उन्हें रोका और उन्हें खालिस्तानी कहा। इस तरह की घटनाएं नियमित रूप से हो रही हैं।' कुमार विश्वास पर आरोप है कि उन्होंने समाचार चैनलों और सोशल मीडिया पर अलगाववादी तत्वों से 'आप' के जुड़ाव का आरोप लगाते हुए भड़काऊ बयान दिया।