पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग से अर्द्धसैनिक बल हटाने के केंद्र सरकार के फैसले पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने केंद्र से 23 अक्टूबर तक और राज्य सरकार से 26 अक्टूबर तक जवाब मांगा है। तब तक सुरक्षा बलों को वहां से हटाने पर रोक बरकरार रहेगी। कोर्ट ने राज्य की ममता बनर्जी सरकार की याचिका पर यह आदेश दिया।


कलकत्ता हाई कोर्ट ने केंद्र को 23 अक्टूबर तक इस मामले में शपथ पत्र देने का आदेश दिया है। वहीं राज्य सरकार को 26 अक्टूबर तक शपथ पत्र देना होगा। मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख 27 अक्टूबर रखी गई है। केंद्र को आदेश दिया गया है कि अगले आदेशों तक दार्जलिंग से फोर्स नहीं हटाएंगे।


पिछले हफ्ते केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दार्जिलिंग से सीआरपीएफ (सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स) की 15 कंपनियों को हटा कर 10 करने का आदेश जारी किया था जिसके बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से आग्रह किया था कि दार्जिलिंग की पहाड़ियों से सुरक्षा बलों को न हटाया जाए।  

उन्होंने केंद्र और बीजेपी पर साजिश रचने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया, 'वे लोग बंगाल को अस्थिर करने के लिए साजिश कर रहे हैं ताकि हिंसा होती रहे।' ममता ने कहा कि केंद्र ने कहा है कि वह 15 में से 10 कंपनियां वापस ले लेगा। उन्होंने कहा, 'केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मुझसे कहा कि सात कंपनियां वापस ली जाएंगी। मैं पूछना चाहती हूं कि बंगाल के लोगों के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों है जबकि अन्य राज्यों में बड़ी संख्या में केंद्रीय बल तैनात हैं।'


उन्होंने दार्जिलिंग से बीजेपी सांसद एस एस अहलूवालिया पर जीजेएम प्रमुख बिमल गुरुंग को क्षेत्र में गड़बड़ी करने में मदद देने का आरोप लगाया। बिमल पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि वह उत्तर-पूर्व में आतंकी संगठनों से जुड़े हुए हैं और उन्हें बांग्लादेश और नेपाल से सहायता मिलती है। उन्होंने कहा कि बीजेपी एक सीट के लिए पहाड़ी को जलने की अनुमति दे रही है।