पूर्वोत्तर भारत के दो राज्यों नागालैंड व मणिपुर में हाई अलर्ट जारी किया गया है। केंद्र सरकार और नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (आईएम) के बीच शांति वार्ता अपने आखिरी चरण में पहुंच गया है। केंद्र और एनएससीएन (आईएन) के बीच एक समझौते पर अभी हस्ताक्षर नहीं हो पाए हैं। ऐसे में किसी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए नगालैंड और मणिपुर को हाई अलर्ट पर रखा गया है। साथ ही इन राज्यों के पुलिसकर्मियों की छुट्टियां भी रद कर दी गई हैं।

माना जा रहा हैकि नगालैंड के कुछ बागी गुटों में नाराजगी पैदा हो सकती है। नगालैंड के डीजीपी टी जॉन लॉन्गकुमेर के करीब 60 साल से लटके नगा शांति समझौते पर दस्तखत किया जाना सबसे ज्यादा मुश्किल काम हो सकता है। इसी वजह से सशस्त्र पुलिस की 7 रिजर्व बटालियन को स्टैंडबाई रखा गया है।

बताय गया है कि इन राज्यों में 2 महीने का राशन और ईंधन भी जमा कर लिया गया है। पड़ोसी राज्य मणिपुर के उखरूल जिले में प्रशासन ने नागरिक आपूर्ति विभाग से जरूरी सामान जमा करके रखने को कह दिया है ताकि किसी तरह की प्रतिकूल स्थिति पैदा होने पर आपूर्ति में बाधा न हो।

वहीं क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के साथ भाजपा का प्रतिनिधिमंडल इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से मिलना चाहता है। नगालैंड के मुख्य सचिव टेमजेन टॉय के मुताबिक हालात सामान्य हैं। उन्होंने कहा कि आम जनता को डरने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि उनकी सुरक्षा के लिए राज्य की पुलिस हाई अलर्ट पर रखा गया है।

राज्य में प्रभावशाली नागा स्टूडेंट्स फेडरेशन ने प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन भी दिया था जिसमें एक नागा राष्ट्रीय ध्वज के जरिए नागा पहचान को अस्तित्व दिए जाने की मांग की गई थी। केंद्र और एनएससीएन (आईएन) के बीच हुई बातचीत के आखिरी चरण में अलग झंडे और संविधान को लेकर गतिरोध खत्म नहीं किया जा सका।