स्थानीय मीडिया ने बताया कि हाल ही में कनाडा और पश्चिमी अमरीका के कुछ हिस्सों को झुलसाने वाली घातक हीटवेव का आना जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के बिना लगभग असंभव है। प्रमुख वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक अध्ययन का हवाला देते हुए प्रकाशित यूएसए टुडे की रिपोर्ट में कहा कि ग्लोबल वार्मिंग ने हाई तापमान को कम से कम 150 गुना और बढ़ाने की संभावना बना दी है।

वाशिंगटन विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर हेल्थ एंड द ग्लोबल एनवायरनमेंट के अध्ययन के सह-लेखक क्रिस्टी एल ईबी ने कहा कि अमेरिका में, गर्मी से संबंधित मृत्यु दर को नंबर 1 बनाने में वेदर रिलेटिड किलर सूसे बड़ी एक वजह है। अपने अध्ययन में, शोधकतार्ओं की टीम ने कहा कि घातक हीटवेव एक 1,000 साल में एक बार होने वाली घटना थी। यूएसए टुडे की रिपोर्ट में कहा गया है कि जहां सैकड़ों लोगों के गर्मी के कारण मरने की सूचना है, वहीं दोनों देशों ने रिकॉर्ड तोड़ उच्च तापमान देखा। अध्ययन में पाया गया है कि आज होने वाली हर गर्मी की लहर जलवायु परिवर्तन से अधिक संभावित और अधिक तीव्र हो जाती है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अध्ययन, वल्र्ड वेदर एट्रिब्यूशन द्वारा तैयार किया गया था, जो एक अंतरराष्ट्रीय सहयोग है । ये मौसम की घटनाओं, जैसे तूफान, अत्यधिक वर्षा, गर्मी की लहरों, ठंडे मंत्र और सूखे पर जलवायु परिवर्तन के संभावित प्रभाव का विश्लेषण और संचार करता है। उच्च तापमान के लिए कनाडा का पिछला राष्ट्रीय रिकॉर्ड 45 डिग्री था, लेकिन ब्रिटिश कोलंबिया के लिटन गांव में हाल ही में गर्मी की लहर 49.6 डिग्री दर्ज की गई। जल्द ही जंगल की आग से गांव काफी हद तक नष्ट हो जाएंगे। इस बीच, अमेरिकी राज्यों ओरेगन और वाशिंगटन में, कई शहरों में 40 डिग्री से अधिक का रिकॉर्ड उच्च तापमान देखा गया।