बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के अपने सरकारी आवास में कोविड केयर सेंटर खोलने और सरकार से नियमानुसार अपनाने पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने बुधवार को कहा कि घर में बेड लगा देने से अस्पताल नहीं बनता। उन्होंने कहा, मैं भी अपने आवास में बिछावन लगा दूं तो क्या वह अस्पताल बन जाएगा? उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति अपने घर में अस्पताल नहीं खोल सकता।

स्वास्थ्य मंत्री ने पत्रकारों से कहा, व्यवस्थाओं को किस तरीके से चलाना है, ये सिस्टम तय करता है। अगर घर में कोई जबरदस्ती अस्पताल खोल ले तो उसे उसकी मान्यता लेनी पड़ेगी। बिना स्वीकृति और मान्यता के कोई अस्पताल खोल दे और अगर कोई कैजुअल्टी या घटना हो गई तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? पांडेय ने तेजस्वी पर भडक़ते हुए कहा कि पूरे कोरोना काल में नेता प्रतिपक्ष गायब हैं। उन्होंने पत्रकारों से भी कहा कि आपलोग भी उनसे (तेजस्वी यादव ) से प्रत्यक्ष रूप से नहीं मिल पाए। उनसे मिलना आपके लिए भी एक चुनौती है। इधर, पूर्व उपमुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद सुशील मोदी ने भी तेजस्वी के कोविड केयर सेंटर पर कटाक्ष किया है।

मोदी ने अपने अधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर लिखा, तेजस्वी को सरकारी आवास के बजाय अवैध तरीके से पटना में अर्जित दर्जनों मकानों में से किसी को कोविड अस्पताल बनाना चाहिए था, जहां गरीबों का मुफ्त में इलाज होता। कांति देवी ने मंत्री बनने के बदले जो दो मंजिला भवन तेजस्वी यादव को गिफ्ट किया था, उसमें या राबड़ी देवी के पास जो 10 फ्लैट बचे हैं, उनमें अस्पताल क्यों नहीं खोला गया? मोदी ने सवालिया लहजे में एक अन्य ट्वीट में लिखा, तेजस्वी यादव के परिवार में दो बहनें एमबीबीएस डाक्टर हैं। कोरोना संक्रमण के दौर में उनकी सेवाएं क्यों नहीं ली गईं? यदि राजद नेतृत्व में गरीबों की सेवा के लिए तत्परता और गंभीरता होती, तो अस्पताल शुरू करने के लिए पहले सरकार से अनुमति ली जाती और उसके मानकों का पालन किया जाता।

उन्होंने कहा कि बिना डॉक्टर, उपकरण-स्वास्थ्यकर्मी के किसी परिसर में केवल कुछ बेड लगा देने से अस्पताल नहीं हो जाता। इससे केवल अस्पताल होने का नाटक किया जा सकता है। इससे पहले, तेजस्वी ने अपने सरकारी आवास को कोविड केयर सेंटर में तब्दील कर अपने निजी कोष से वहां बेड, ऑक्सीजन की व्यवस्था कर अब सरकार से इसे नियमानुसार अपनाने की अपील की है।