अक्सर लोग मानसिक स्थिति को सिर्फ पागलपन से जोड़ते थे। लेकिन अब चीजे बदल गई हैं। दुनियाभर के शोधकर्ता इस बात पर रिसर्च करने के साथ ही आम लोगों को मानसिक स्वास्थ्य और आहार के बीच के संबंध के बारे में भी बता रहे हैं। अब कुछ मानसिक रोग जैसे अल्जाइमर, डिमेंशिया के मामले बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के ही मेंबर और न्यूट्रिशनिस्ट, साइकेट्रिस्ट ने कुछ ऐसी खाद्य सामग्री के बारे में बताया है जो न केवल आंत के अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचाती है।

हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स फूड यानी वह फूड जो आसानी से रक्त वाहिकाओं में में चला जाता है और रक्त शर्करा के स्तर बढ़ा देता है। इसमें ब्रेड, पास्ता आदि चीजें आती हैं जो रिफाइंड कार्ब्स की श्रेणी में गिनी जाती हैं। भले ही यह पदार्थ मीठे ना हो लेकिन शरीर इन्हें शुगर के रूप में ही देखता है। ऐसे में जब आप इनका अधिक सेवन करते हैं तो आगे चलकर यह वजन बढ़ने, मेटाबॉलिक डिसऑर्डर और डायबिटीज जैसी बीमारियों को जन्म देने लगते हैं।

एक रिसर्च के मुताबिक जो लोग सही आहार या गुड कार्ब्स, जैसे होल ग्रेन, कच्ची गाजर और हरी पत्तेदार सब्जियों आदि का सेवन करते हैं। उन्हें डिप्रेशन होने के आसार 30 प्रतिशत कम हो जाते हैं।

हाई नाइट्रेट फूड को लेकर हाल ही में हुई रिसर्च बताती है कि यह डिप्रेशन को बढ़ा सकता है। साथ ही यह हमारी आंत के अच्छे बैक्टीरिया को भी नुकसान पहुंचाता है और बाइपोलर डिसऑर्डर की स्थिति पैदा कर सकता है। आपको बता दें कि यह एक ऐसा पर्सरवेटिव है, जिसका उपयोग भोजन के रंग को बेहतर करने के लिए किया जाता है। आमतौर पर सलामी, सॉसेज और बेकॉन जैसी खाद्य सामग्रियों में इसका उपयोग होता है। स्वस्थ रहने के लिए इन सामग्रियों से दूरी बनाकर रखें।

शराब को कभी भी एक हेल्दी लाइफस्टाइल का हिस्सा नहीं माना जाता था। लेकिन बावजूद इसके लोग तनाव को कम करने और कई दूसरे कारणों की वजह से शराब का बहुत ज्यादा सेवन करने लगें हैं। वहीं बहुत कम लोग ही इस बात पर ध्यान भी दे पाते हैं कि शराब के सेवन से ब्रेन फॉग और मनोभ्रंश की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। कई बार यह अगले दिन तक भी बनी रहती है।

इसके अलावा साल 2018 के ब्रिटिश मेडिकल के जर्नल में बताया गया है कि जो लोग शराब का सेवन करते हैं, और सप्ताह में 14 या उससे अधिक व कम पेय करते थे। इनमें डिमेंशिया की स्थिति पैदा होने का जोखिम बढ़ जाता है। वहीं वह लोग जो शराब का सेवन नहीं करते, वह इस स्थिति से बचे रहते हैं।

जब भी आप तला हुआ भोजन जैसे पकोड़े, फ्राइड चिकन या डोनट्स आदि का सेवन करते हैं, तो यह आपकी कॉग्निटिव हेल्थ पर बेहद बुरा असर डालता है। हाल ही में हुए अध्ययन के मुताबिक जो लोग अधिक मात्रा में तली हुई खाद्य सामग्री का सेवन करते हैं।

उनकी याददाश्त कमजोर होने लगती है। ऐसा इसलिए क्योंकि जब हम अधिक मात्रा में ऐसे पदार्थों का भोजन करते हैं तो यह मस्तिष्क तक जाने वाली रक्त वाहिकाओं में सूजन पैदा कर देते हैं। इससे याददाश्त कमजोर हो सकती है। इसके अलावा एक अन्य अध्ययन बताता है कि डीप फ्राइड फूड डिप्रेशन के जोखिम को भी बढ़ा देता है।

जब भी हम शुगर का सेवन करते हैं तो बॉडी उसे ग्लूकोज में तब्दील कर देती है और यही हमें ऊर्जा के रूप में मिलती है। ऐसे में जब आप अधिक मात्रा में शुगर का सेवन करते हैं तो यह मस्तिष्क के कामकाज में बाधा उत्पन्न करती है और याददाश्त पर भी बुरा असर डालती है। इसलिए बाजार में मौजूद बेक्ड फूड, और शुगर युक्त सोडा का सेवन करने से बचें। क्योंकि आगे चलकर आर्टिफिशियल शुगर से बने यह पदार्थ, आपकी कॉग्निटिव हेल्थ को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की ओर से भी सिफारिश की गई है कि एक पुरुष को दिनभर में 36 ग्राम और महिलाओं को 25 ग्राम एडेड शुगर युक्त खाद्य सामग्री का ही सेवन करना चाहिए।