आजकल के समय में कंप्यूटर हर किसी के जीवन की जरूरत बन गया है। अगर आप भी डेस्कटॉप पर काम करते हैं तो देखा होगा कि इसके C ड्राइव में सॉफ्टवेयर इंस्टॉल होता है। इसके अलावा आप अपना डेटा D या E ड्राइव में रखते हैं। लेकिन कभी सोचा है कि आखिर ऐसा क्यों होता है। कंप्यूटर में ड्राइव C से ही क्यों शुरू होती है A या B से क्यों नहीं।

इस बात का जवाब पुराने कंप्यूटर में छुपा है। दरअसल, पहले कंप्यूटर्स में इंटरनल स्टोरज का इस्तेमाल नहीं होता था यानी आप कंप्यूटर में किसी डेटा चीज को सेव नहीं कर सकते थे। किसी भी काम को करने के लिए कंप्यूटर में फ्लॉपी​ डिस्क ड्राइव को लगाना होता था। कंप्यूटर की शुरुआत में इन्हीं फ्लॉपा डिस्क ड्राइव को A ड्राइव कहा जाता था।

कंप्यूटर के लिए दो तरह के फ्लॉपी डिस्क का इजाद हुआ 5 1/4 इंच और दूसरा 3 1/2 इंच। कंप्यूटर में इन दोनों फ्लॉपी डिस्क को रन करने के लिए दो तरह के ड्राइव का इस्तेमाल किया जाता था। इन्हें ही ड्राइव A और ड्राइव B कहा गया। आज भी जब आप डेस्कटॉप लेते हैं तो इन दो ड्राइव के लिए उसमे जगह रिजर्व होती है।

कंप्यूटर में हार्डड्राइव का चलन बहुत पुराना नहीं है। 1980 के बाद ये चलन में आया। आसान स्टोरेज, इनबिल्ट सुविधा और डेटा नष्ट होने का कम खतरा होने की वजह से जल्द ही हार्डड्राइव प्रचलित हो गया। तीसरे श्रेणी के इस ड्राइव को कंप्यूटर में C ड्राइव कहा गया। हाईड्राइव के C ड्राइव में कंप्यूटर का ऑपरेटिंग सिस्टम इंस्टॉल किया जाता है।

हार्ड ड्राइव को अलग-अलग पार्टिशन किया जाता और इस को D और E ड्राइव कहा जाता है। वहीं अगर आप किसी एक्सटरनल डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं, तो उसे कंप्यूटर F और G डिवाइस दिखाता है। लेकिन अगर आपके पास कंम्प्यूटर का एडमिनिस्ट्रेटिव राइट है तो आप C ड्राइव को A या B ड्राइव भी बना सकते हैं।