नए साल यानि 2022 में प्रवेश कर जाएंगे। आज से 10 दिन बाद 2021 को अलविदा कहते हुए पूरी दुनिया नए साल 2022 का खुले दिल से स्वागत करेगी। सभी की यही चाहत होगी कि नया साल खुशियां लेकर आए। साथ ही लोगों की यह मनोकामना जरूर होगी कि कोरोना महामारी का 2022 में अंत हो जाए। पूरी दुनिया 31 दिसंबर को मध्यरात्रि 12 बजे के बाद पुराने साल को अलविदा करते हुए नए साल का स्वागत करती है। अब यहां पर यह जान लेना भी जरूरी है कि हम हर साल जनवरी में ही नया साल क्यों मनाते हैं।

सदियों तक नया साल 1 जनवरी को नहीं मनाया जाता था। यह कभी 25 मार्च तो कभी 25 दिसंबर को मनाया जाता था। सबसे पहले रोम के राजा नूमा पोंपिलस ने रोमन कैलेंडर में बदलाव किए थे। कैलेंडर में जनवरी को पहला माना गया। इस बदलाव से पहले तक मार्च को पहला महीना माना जाता था।

अब आपको बताते हैं जनवरी महीने का नाम कैसे पड़ा। जनवरी का नाम जानूस (Janus) पर रखा गया है। जानूस को रोम में शुरुआत का देवता माना जाता है।

मार्च का नाम मार्स (mars) पर पड़ा है। मार्स को युद्ध का देवता माना गया है। सबसे पहले इजाद हुए कैलेंडर में सिर्फ 10 महीने ही होते थे। वहीं, एक साल में 310 दिन होते थे, सप्ताह भी 8 दिनों का होता था।

रोमन कैलेंडर में रोम के अगले शासक जूलियस सीजर ने कुछ बदलाव किए। उन्होंने 1 जनवरी से नए साल की शुरुआत की। जूलियस कैलेंडर में साल में 12 महीने किए गए। जूलियस सीजर ने खगोलविदों से मुलाकात के बाद जाना कि पृथ्वी 365 दिन और छह घंटे में सूर्य की परिक्रमा लगाती है। इसे ध्यान में रखते हुए जूलियन कैलेंडर में साल में 310 की जगह 365 दिन किया गया।

बचे हुए 6 घंटे को लीप ईयर का कॉन्सेप्ट दिया गया। हर 4 साल में यह 6 घंटे मिलकर 24 घंटे हो जाते हैं, यानी एक दिन। इसे देखते हुए हर चौथे साल फरवरी को 29 दिन का किया गया और इस साल को लीप ईयर का नाम दिया गया।

पोप ग्रेगरी ने 1582 में जूलियन कैलेंडर में लीप इयर को लेकर त्रुटि निकाली। सेंट बीड नाम के धर्म गुरु ने उस वक्त बताया कि एक साल में 365 दिन और 6 घंटे न होकर 365 दिन 5 घंटे और 46 सेकंड होते हैं। रोमन कैलेंडर में बदलाव करते हुए नया कैलेंडर पेश किया गया। तब से 1 जनवरी को नए साल की मनाया जाने लगा।

भारत में नया साल अलग-अलग जगह स्थानीय रिवाज के हिसाब से भी मनाया जाता है। नए साल की ज्यादातर तिथियां मार्च या अप्रैल के महीने में पड़ती हैं। पंजाब में नया साल बैसाखी के रूप में 13 अप्रैल को मनाया जाता है। सिख धर्म को मानने वाले इसे नानकशाही कैलेंडर के अनुसार मार्च में होली के दूसरे दिन मनाते हैं। जैन धर्म के लोग नए साल को दिवाली के अगले दिन मनाते हैं। यह भगवान महावीर स्वामी की मोक्ष प्राप्ति के अगले दिन से शुरू होता है।