बुढ़ापे की ओर इंसान का शरीर कई तरह के बदलावों से गुजरता है। 50 साल के बाद शरीर अंदर से कमजोर पड़ने लगता है और कई अंग पहले से ज्याद कमजोर हो जाते हैं। अगर आपके पिता की उम्र भी 50 साल या इससे ज्यादा है तो आपको उनकी सेहत पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। आप उनके शरीर में दिख रहे कुछ वॉर्निंग साइन समझकर उन्हें किसी बड़े खतरे से बचा सकते हैं।

50 साल की उम्र में ब्रेन फंक्शन बढ़ जाता है। हालांकि 55 साल के आसपास दिमाग पर जोर पड़ने की वजह से यादाश्त धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है। अपनी यादाश्त बढ़ाने के लिए मेडिटेरेनियन डाइट अपनाएं। इसमें खूब सारे फल, सब्जियां, साबुत अनाज और हेल्दी फैट्स शामिल करें।

इस उम्र में इम्यून सिस्टम कमजोर होने लगता है और इंफेक्शन से लड़ने वाली कोशिकाएं पहले की तरह मजबूती से काम नहीं कर पाती हैं। इसकी वजह से फ्लू, निमोनिया और टिटनस से बीमार होने का खतरा बढ़ जाता है। इस उम्र फ्लू की वैक्सीन जरूर लगवानी चाहिए।

सुनने की क्षमता पर असर- 50 साल से ज्यादा उम्र के 40 फीसद लोगों में सुनने की क्षमता कम हो जाती है। हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट प्रॉब्लम या फिर डायबिटीज जैसी बीमारियों के असर से भी एक उम्र के बाद सुनाई देना कम होने लगता है। अगर आपको भी ऐसी कोई दिक्कत है तो डॉक्टर से संपर्क कर जरूरी टेस्ट कराएं।

50 की उम्र में आने के बाद हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं। इस उम्र में कोशिकाओं के टूटने का खतरा बढ़ जाता है। 50 की उम्र के बाद आपको कैल्शियम और विटामिन D वाले फूड ज्यादा खाने चाहिए। हड्डियों को मजबूत बनाने वाली एक्सरसाइज करें।

मांसपेशियां और जोड़ों पर असर- उम्र का सबसे ज्यादा असर मांसपेशियों पर पड़ता है। आपकी शारीरिक शक्ति कमजोर होने लगती है। इसे मजबूत बनाने के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग एक्सरसाइज करना आपके लिए अच्छा रहेगा। इससे आपकी मांसेपेशियों का घनत्व बढ़ेगा और संतुलन भी सही रहेगा। इस उम्र में जोड़ों का दर्द और आर्थराइटिस भी हो जाता है। बॉडी पोश्‍चर रखें और शरीर में पानी की कमी ना होने दें। पानी की की कमी का असर भी ज्वाइंट टिश्यू पर पड़ता है।

दिल पर असर- 50 की उम्र में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। इससे बचने के लिए हर दिन 30 मिनट एक्सरसाइज और वॉक करें। अपना वजन ना बढ़ने दें और ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रखें। अगर आप स्मोकिंग करते हैं तो इस उम्र में आते ही सिगरेट से दूर बना लें।

बालों और स्किन पर असर- इस उम्र में बाल सफेद, पतले और बहुत कमजोर हो जाते हैं। खासतौर से पुरुषों की बालों पर उम्र का असर साफ दिखाई देने लगता है। हालांकि इसमें परेशान होने की कोई बात नहीं है। आप चाहें तो इसे कलर भी कर सकते हैं। वहीं कुछ लोगों की स्किन पर कुछ धब्बे से बनने लगते हैं। स्किन रूखी होने लगती है। इस उम्र में स्किन कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है इसलिए किसी भी दिक्कत को नजरअंदाज ना करें और समय रहते डॉक्टर से जरूर संपर्क करें।

अगर आपको कुछ पढ़ते समय आंखों पर जोर लगाना पड़ता है तो इसका मतलब कि उम्र का असर आपकी आंखों की रोशनी पर भी पड़ने लगा है। वैसे तो इस उम्र तक आते-आते आमतौर पर लोगों को चश्मे की जरूरत होने लगती है। फिर भी नियमित रूप से अपनी आंखों की जांच कराते रहें।

इस उम्र में कई तरह की बीमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए कोलोन कैंसर, मैमोग्रामी टेस्ट, प्रोस्टेट कैंसर और टेस्टिकुलर कैंसर की समय-समय पर जांच कराते रहें। किसी भी तरह के लक्षण को नजरअंदाज ना करें और घर में अगर कोई आनुवांशिक बीमारी चली आ रही है तो इसके बारे में अपने डॉक्टर को जरूर बताएं। वो आपको कुछ अन्य टेस्ट भी कराने की सलाह दे सकते हैं।