हनुमान जी एकमात्र ऐसे देवता है जिनका जन्मदिन साल में दो बार आता है। यही बात है कि  महवीर हनुमानजी के बारे में कई ऐसी बाते हैं जो उन्हें सभी देवताओं से खास बनाते हैं। पौराणिक मत के अनुसार हनुमानजी महज एक ऐसे देवता हैं जो त्रेतायुग से लेकर आज तक और सृष्टि के अंत तक अपने शरीर के साथ इस धरती पर मौजूद हैं। तुलसीदासजी को इस बात का प्रमाण स्वंय हनुमानजी ने दिया है। धार्मिक मान्यता तो यह भी है कि जहां भी राम कथा होती है वहां हनुमानजी किसी ना किसी रूप में मौजूद रहते हैं।


चिरंजीवी हनुमानजी के जन्म स्थान और जन्मतिथि को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं। एक मान्यता जो उत्तर भारत में अधिक प्रचलित है उसके अनुसार कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी यानी दीपावली से एक दिन पहले हुआ था। बाल्मिकी रामायण में इस बात का उल्लेख मिलता है कि मंगलवार के दिन स्वाती नक्षत्र में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के दिन हनुमानजी का प्राकट्य हुआ था। जबकि एक अन्य मान्यता के अनुसार चैत्र शुक्ल पूर्णिमा तिथि को बजरंगबली का जन्म हुआ था। इस वर्ष यह तिथि 8 अप्रैल दिन बुधवार को है। इस तरह हनुमानजी का जन्मदिन पूरे देश 2 दिन मनाता है।
हनुमानजी की जन्मतिथि को लेकर जैसे एक मत नहीं है उसी प्रकार उनके जन्मस्थान को लेकर भी एक मत नहीं है। एक मत के अनुसार झारखंड के गुमला जिले में एक गांव है जिसका नाम आंजन है। यहीं एक गुफा में हनुमानजी का जन्म हुआ था। यहां हनुमानजी की एक प्राचीन प्रतिमा है जिसे इस बात का प्रमाण बताया जाता है कि यहीं शिव भक्तिनी अंजनी ने हनुमानजी को जन्म दिया था।
हनुमानजी के जन्म स्थान को लेकर चर्चित स्थानों में कर्नाटक का हंपी भी प्रसिद्ध है। ऐसी मान्यता है कि यह वही स्थान है जहां रामायण काल में किष्किंधा नगरी हुआ करती थी, जहां के राजा सुग्रीव थे। यहीं हनुमानजी के पिता केसरी जी रहा करते थे। इसके अलावा गुजरात के डांग जिले के लोग भी यह दावा करते हैं कि यहां अंजनी गुफा में हनुमानजी का जन्म हुआ था। हनुमानजी के जन्मस्थान और जन्मतिथि को लेकर जो भी मत हो लेकिन इनके दोनों ही जन्मतिथि पर इनही पूजा विशेष फलदायी मानी गई है।
चैत्र शुक्ल पूर्णिमा के दिन हनुमान जयंती होने की वजह से हिंदू धर्म में इसका बड़ा ही महत्व है। इस वर्ष चैत्र शुक्ल पूर्णिमा तिथि 7 अप्रैल को दिन में 2 बजकर 33 मिनट पर लग रही है और यह अगले दिन यानी 8 अप्रैल सुबह 8 बजकर 3 मिनट तक रहेगी। इसलिए हनुमान जयंती की पूजा के लिए सबसे उत्तम समय सूर्योदय से 8 बजकर 3 मिनट तक है। वैसे शास्त्रीय मत यह कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है पूरे दिन उस तिथि की मान्यता रहती है। इसलिए आप पूरे दिन हनुमानजी की आराधना कर सकते हैं।
हनुमान जयंती के दिन पवित्र नदियों, सरोवरों में स्नान करके हनुमानजी को चोला, सिंदूर और लड्डू अर्पित करने की परंपरा है। इस दिन हनुमानजी की प्रसन्नता के लिए हनुमान भक्तों को हनुमान चालीसा, सुंदर कांड, बजरंग बाण और रामायण का पाठ करना चाहिए। हनुमानजी को चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर लेपन करना चाहिए। चमेली या सरसों के तेल से दीप जलाएं और लाल रंग की बाती का प्रयोग करना चाहिए।",