राज्य की शिलांग लोकसभा सीट को अपनी झोली में डालने की बनाई गई एमडीए की सारी रणनीति विफल रही। यहां कांग्रेस के प्रत्याशी विंसेंट एच पाला एक लाख से अधिक मतों के अंतर से विजयी रहे। एमडीए के साझा उम्मीदवार तथा यूडीपी कोटे से शिलांग सीट पर मुकाबले में उतरे जेमिनो मावथोह को पराजय का मुंह देखना पड़ा। भाजपा तीसरे नंबर की पार्टी रही।


मालूम हो कि सत्तारूढ़ एनपीपी की अगुवाई में पांच दल मिलकर राज्य की दोनों सीटों पर चुनाव लड़े थे। तुरा से एनपीपी और शिलांग सीट से यूडीपी को लड़ने के लिए दिया गया। एमडीए की कोशिश थी कि इस बार राज्य की दोनों सीटों पर कब्जा जमाया जाए। लोकसभा चुनाव के दो महीने पहले से ही ये रणनीति बना रहे थे। यहां साझा प्रत्याशी उतारा गया, जिसमें एनपीपी, यूडीपी, एचएसपीडीपी, पीडीएफ और एनपीपी ने मिलकर दोनों जगहों से प्रत्याशी दिए।


तुरा में एनपीपी कोटे से खड़ी मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा की बहन अगाथा संगमा की जीत हुई। यहां अगाथा ने पूर्व मुख्यमंत्री डाॅ. मुकुल संगमा को बुरी तरह पराजित किया पर शिलांग में एमडीए को बड़ा धक्का लगा। सारी रणनीति असफल रही। मुख्यमंत्री कोनराड ने तुरा के साथ-साथ शिलांग सीट के लिए प्रचार किया था। उनकी एमडीए सरकार के मंत्री-विधायकों ने भी मैदान में मेहनत की, किंतु काम नहीं आई। कांग्रेस पिछली बार के मुकाबले इस बार और अधिक मतों के अंतर से विजयी रही। यूडीपी बड़ी कोशिश करते हुए कई दलों को एकजुट कर साझा प्रत्याशी पर सहमति बना पाई थी।


एनपीपी को तुरा से लड़ने और खुद के लिए शिलांग सीट पर मुकाबला हेतु सभी तैयार थे। चूंकि खासी हिल्स में एनपीपी का जनाधार इतना खास नहीं है, इसलिए वह मान गई थी। एमडीए की भाजपा भी सहयोगी थी पर उसने राज्य में अकेले चुनाव लड़ा। हालांकि उसे कुछ फायदा नहीं हुआ। दोनों सीटों पर भाजपा तीसरे नंबर पर रही।