विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि वाराणसी में ज्ञानवापी में सर्वेक्षण के दौरान शिवलिंग मिला है और कहा कि इससे स्वयं सिद्ध हो गया है कि वह स्थान वास्तव में एक मंदिर है जो 1947 से पहले से है। 

ये भी पढ़ेंः मंदिर से चोरी तो चोर को आने लगे डरावने सपने, परेशान होकर लौटायी मूर्तियां और लिखी चिट्ठी


आलोक कुमार ने यहां संवाददाताओं से कहा कि ज्ञानवापी मंदिर में सर्वेक्षण के दौरान एक कमरे में शिवलिंग प्राप्त हो गया है और यह बहुत आनंद का समाचार है। उन्होंने कहा कि शिवलिंग दोनों पक्षों और उनके वकीलों की उपस्थिति में मिला है। इसलिए शिवलिंग वाला स्थान मंदिर है। यह तथ्य स्वयं सिद्ध हो चुका है कि वहां मंदिर अब भी है और 1947 में भी था। उन्होंने आशा जताई है कि ज्ञानवापी में सर्वेक्षण के दौरान मिले इस साक्ष्य को समस्त देशवासी स्वीकार करेंगे और इसका आदर करेंगे। उन्हें भरोसा है कि शिवलिंग मिलने के बाद इसकी जो स्वाभाविक परिणतियां हैं, देश उस तरफ आगे बढ़ेगा। उन्होंने बताया कि न्यायालय ने ज्ञानवापी के शिवलिंग वाले हिस्से को संरक्षित किया है, सील किया है। पुलिस अधिकारियों का दायित्व है कि वहां कोई छेड़छाड़ नहीं हो। 

ये भी पढ़ेंः केजरीवाल का गंभीर आरोप, कहा-राजधानी में 63 लाख लोगों के घरों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी में भाजपा


उन्होंने भरोसा जताया कि यह विषय अपने परिणाम तक पहुंचेगा। कुमार ने कहा कि मामला क्योंकि अभी न्यायालय में है, इसलिए अधिक टिप्पणी करना ठीक नहीं होगा। न्यायालय का निर्णय आने के बाद विश्व हिंदू परिषद इसके बारे में आगे विचार करेगी और तभी तय किया जाएगा कि अगला कदम क्या उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमने कहा था कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण तक हम न्यायालय के निर्णय की प्रतीक्षा करेंगे। अब बदली हुई परिस्थितियों में हम इस मामले को आगामी 9-10 जून को हरिद्वार में होने वाली अपने केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक में पूज्य सन्तों से समक्ष निवेदित करेंगे। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के वीडियोग्राफी सर्वेक्षण के दौरान मस्जिद परिसर में शिवलिंग मिलने के बाद स्थानीय अदालत ने जिला प्रशासन को उस स्थान को तत्काल प्रभाव से सील करने के आदेश दिये हैं जहां शिवलिंग मिला है। 

ज्ञानवापी मस्जिद परिसर की वीडियोग्राफी सर्वे का काम सोमवार को पूरा हो गया। जिसके तुरंत बाद हिंदू पक्ष की ओर से उसके वकील हरिशंकर जैन ने अदालत में प्रार्थना पत्र पेश गया। प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि मस्जिद परिसर में 16 मई, सोमवार को सर्वे के दौरान शिवलिंग पाया गया है। यह महत्वपूर्ण साक्ष्य है। आवेदन में न्यायालय से अनुरोध किया गया कि वह सीआरपीफ के कमांडेंट को आदेश दे कि इस स्थान को सील कर दिया जाये, साथ ही वाराणसी के जिलाधिकारी को आदेश दिया जाये कि वहां मुसलमानों का प्रवेश वर्जित कर दे। हिंदू पक्ष के आवेदन में यह भी अनुरोध किया गया है कि मस्जिद में केवल 20 मुसलमानों को नमाज अता करने की इजाजत दी जाये तथा उन्हें वजू करने से तत्काल रोका जाये। न्यायाधीश दिवाकर ने इस आवेदन के संबंध में कहा कि मस्जिद परिसर में अदालत के आदेश से ही वीडियोग्राफी सर्वे का काम हुआ है। परिसर में शिवलिंग मिलने के बाद उसे संरक्षित किया जाना अतिआवश्यक है। न्यायालय ने कहा, न्याय हित में वादी पक्ष का आवेदन स्वीकार किये जाने योग्य है।