गुवाहाटी । गुवाहाटी शहर के आसपास के इलाकों के ग्रामीण लोगों के लिए यहां के फुटपाथ रोटी का सहारा बन गए हैं । सड़क और रेलमार्ग बेहतर होने के बाद खासकर पिछले दो-तीन सालों में आसपास के गावों से लोग साग-सब्जी लेकर गुवाहाटी पहुंचते है और सड़कों के किनारे बैठ कर उसे बेचकर अपना रोज़गार कर लेते हैं । इन लोगो के कारण नगर के वासियों को ताजी सब्जी और यह भी काफी सस्ती दरों पर मिल जाती है । 

लेकिन गांव के इन गरीबो पर भी सिंडिकेट का छाया मंडराने लगा हैं। बरपेटा, खालपाड़ा, सरभोग,  नलबाडी और जागीरोंड आदि इलाकों से सैकडों ग्रामीण जिसमें अधिकांश महिलाएं होती है रोज़ सुबह सब्जी लेकर पहुंचती है । उन्हें  यहा अपने गांव के वनिस्पत दो-चार रुपया ज्यादा  मिलने के साथ उनके खेतों का सामान बिक जाता है । 

कई जगहों पर जहां कम मात्रा में सब्जी की खेती होती है और वहां को व्यापारी नहीं पहुचते है वहां के खेतिहर लोगों  के  लिए गुवाहाटी के  फुटपाथ बहुत बड़े  बाजार साबित हो रहे हैं। 

लेकिन  इस बाजार पर भी  नगर के दादाओं की कुदर्ष्टि  लग गई है । गांव के इन भोले भाले लोगों पर दादागिरी टैक्स बांध  दिया गया है । इन लोगों से 80 रुपए से 125 रुपए तक वसूले जाते हैं। 

नारंगी रेलवे स्टेशन और जामुनी मैदाम रेलवे कालोनी के साथ नगर के विभिन्न इलाकों में जहां भी फुटपाथों पर ये सब्जी विक्रेता बैठते हैं उनसे वसूली हो रही है। फलस्वरूप इन्हे  अपने सामानों की कीमत बढ़ानी  पड़ रही हैऔर इसके कारण इनके रोजगार पर असर पड़ रहा है।

कुछ महिलाओं ने बताया  कि बाजार कमेटी के लोग रोजाना 125 रूपये  लेने लगे हैं। वे कहते है कि रेलवे पुलिस के साथ और कई जगहों में देना पड़ता  है अन्यथा तुम्हें रोड पर दुकान लगाने नहीं देंगें। 

 जागरीड से अपने खेतों में उपजी  भिंडी  लेकर पहुंचे एक किसान का कहना था कि उनसे वसूली नहीं हो तो 30 रुपए किलो बिकने वाली  भिंडी  वे 10 रुपए में बेच सकते  हैं। उन्होंने बताया कि पहले ट्रेनों  में वसूली होती है और उसके बाद रेलवे की जमीन पर बाजार लगाने के बाद भी उसे रोजाना वसूला जाता है । 

लेकिन वसूली शुरू होने के  बाद बहुत सारे लोगों ने आना बंद कर  दिया क्योंकि जितने की बिक्री नहीं होती उससे ज्यादा दादागिरी टैक्स देना पड़ता है।