गुजरात हाईकोर्ट ने कहा है कि- किसी लड़की या महिला को यह बताने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता कि उसके बच्चे का पिता कौन है।  विवाह से पहले गर्भवती हुई नाबालिग लड़की से बच्चे के पिता के बारे में दबावपूर्वक पूछने से संबंधित मामले में हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की।  कोर्ट ने कहा इस केस में लड़की खुद ही कह रही है कि उसे पति के साथ ही रहना है। और वह यह बताने की इच्छुक नहीं है कि उसके बच्चे का पिता कौन है? तो उसे ऐसा करने के लिए किसी के भी द्वारा विवश नहीं किया जा सकता। 

मामला जूनागढ़ निवासी लड़की और उसके प्रेमी से जुड़ा है।  लड़की की उम्र 18 साल होने में एक दिन बाकी था, उसी दिन (24 मार्च, 2020) को देशभर में लॉकडाउन लागू हो गया।  लड़की प्रेमी संग घर से चली गई।  दोनों शादी किए बिना ही साथ रहने लगे।  इस तरह ये दोनों कानूनी उलझन में फंस गए।  दिसंबर 2020 में दोनों ने शादी कर ली।  इसके अगले ही महीने बच्चे को जन्म दिया। 

जब लॉकडाउन खुला तब लड़की आठ महीने की गर्भवती थी।  उस पर दबाव डाला गया कि वह बताए कि बच्चा किसका है।  शादी के एक ही महीने में लड़की ने बच्चे को जन्म दिया।  लड़की के पति के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ।  इस मामले में उसे 10 साल की सजा दे दी गई।  इसी को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।  हाईकोर्ट ने लड़की के पति को उसके खिलाफ दर्ज पॉक्सो के मामले के निपटारे तक 100 रुपए के मुचलके पर जमानत दे दी। 

सिर्फ एक दिन के कानून नहीं थोप सकते

कानून के मुताबिक लड़की 25 मार्च 2020 को शादी कर सकती थी।  पर इससे एक दिन पहले ही लॉकडाउन लग गया।  यानी उसके वयस्क होने में एक दिन बाकी था।  कोर्ट ने कहा कि सिर्फ एक दिन के लिए आप उस पर कानून नहीं थोप सकते।  लड़की के पिता उस पर दबाव बना रहे हैं कि वह बच्चे के पिता की पहचान उजागर करे।  पर किसी महिला को यूं बाध्य नहीं किया जा सकता।  बड़े शहरों में बिन ब्याह बच्चे का जन्म हो तो ऐसी लड़की को मॉडर्न कहा जाता है और ग्रामीण लड़की पर आईपीसी की धाराएं लगाते हो।