कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसान आंदोलन को लेकर पिछले दिनों अंतरराष्ट्रीय हस्तियों की ओर से किए गए ट्वीट्स किसी जगारुकता के तहत नहीं बल्कि भारत की छवि खराब करने के उद्देश्य से किए गए थे। इस साजिश का खुलासा भी सोशल मीडिया के कारण ही हुआ है। 

आंदोलन के समर्थन में पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग की ओर से एक टूलकिट ट्वीट किया गया था। प्रारंभिक जांच में पता चला कि इस टूलकिट को कनाडा स्थित एक खालिस्तानी समर्थक संगठन की ओर से तैयार किया गया था। यह संगठन कनाडा के वैंकूवर में स्थित है। इस पॉवरपॉइंट प्रजेंटेशन में भारत के खिलाफ लक्षित कार्यों की सूची को विस्तार से लिखा गया था। 

टूलकिट में भारत की योग, चाय और विश्वगुरु वाली छवि को नुकसान पहुंचाने की बात कही गई थी। ग्रेटा ने ही इस टूलकिट को ट्वीट किया, लेकिन थोड़ी देर बाद इसे डिलीट कर दिया था। हालांकि इससे पहले ही भारत में कई लोगों ने उनकी पोस्ट के स्क्रीनशॉट ले लिए थे। केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने एक फेसबुक पोस्ट में दावा किया कि ग्रेटा थनबर्ग के डिलीट किए गए ट्वीट से भारत के खिलाफ एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की साजिश का खुलासा हुआ है। 

सिंह ने लिखा कि टूलकिट में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कैसे, कब और क्या करना है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि ग्रेटा थगबर्ग की ओर से गलत तरीके से साझा किए गए भारत विरोधी दस्तावेजों से पता चलता है कि रिहाना और अन्य विदेशी सेलिब्रिटी ने यूं ही नहीं ट्वीट किए थे, ये लोग भारत की छवि को वैश्विक स्तर पर धूमिल करने के लिए चलाए जा रहे एक बड़े अभियान का हिस्सा हैं। इस तरह के सभी बयानों को भारत और विदेश में नियोजित और प्री-स्क्रिप्टेड अभियान के रूप में इस्तेमाल किया गया। दिल्ली पुलिस ने इस टूलकिट की जांच शुरू कर दी है।