आज 21वीं सदी में भी जहां भी बेटियों को बोझ समझा जाता है। इतना ही नहीं बल्कि, बाल-विवाह, लड़कियों की अशिक्षा जैसी कई कुरीतियां अभी मौजूद है उसके नागौर में एक मिसाल पेश की गई है। जी हां, नागौर जिले के कुचेरा क्षेत्र के गांव निम्बड़ी चांदावता का यह मामला है।  इस गांव में एक सामान्य किसान परिवार ने अपने घर में जन्मीं बेटी ऐसा जश्न मनाया कि आप भी इसे जानकर हर कोई हैरान है। कोरोना संकट काल में बेटी के सम्मान की यह खबर आपको भी गौरवान्वित महसूस करवाएगी।

दरअसल, नागौर के किसान मदन लाल प्रजापत के घर 35 साल बाद एक बेटी का जन्म हुआ, जो उनकी पोती सिद्धी है। इसी जन्म की खुशी को पूरे परिवार ने अनूठे अंदाज में मनाया है। मिली जानकारी के अनुसार बेटी को अपने ननिहाल से हेलिकॉप्टर में घर लाया गया है। इतना ही नहीं यहां हेलीपैड से लेकर घर तक रास्ते में गांव वालों ने बच्ची के सम्मान में फूल बिछाए । इसके लिए बाकायदा 10.12 दिन पहले से तैयारियां शुरू हो गई थीं।

उल्लेखनीय है कि पोती के स्वागत के लिए दादा मदनलाल ने कोई कोर. कसर ना छोड़ने का फैसला लिया। लिहाजा उन्होंने अपनी फसल बेचकर 5 लाख रुपये जुटाए । साथ ही इसी रकम से हेलिकॉप्टर का भी इंतजाम किया।

बताया जा रहा है कि बेटी के पिता हनुमान प्रजापत और पत्नी चुका देवी बेटी को अपने ननिहाल से हेलीकॉप्टर से लेकर आए। वहीं बुधवार को पहली बार दुर्गानवमी के मौके पर उसका घर में प्रवेश करवाया गया। बच्ची का जन्म उसके ननिहाल हरसोलाव गांव में तीन मार्च को हुआ था।

बताया जा रहा है कि गांव में अपने दादा के घर पहुंचने के बाद सिद्धी का बेहद भव्य स्वागत किया गया। हेलीपैड स्थल से लेकर घर तक पूरे रास्ते में फूलों की वर्षा हुई। वहीं बैंड-बाजों, गाजे-बाजों के साथ उसका स्वागत सत्कार भी किया गया।
जानकारी के अनुसार नानी के घर से बिटिया सिद्धी को पिता हनुमानराम, फूफा अर्जुन प्रजापत, हनुमान राम के चचेरे भाई प्रेम व राजूराम पहुंचे थे। सुबह 9 बजे हेलिकॉप्टर में बैठकर सभी निम्बड़ी चांदावता से बच्ची के ननिहाल हरसोलाव पहुंचे। वहीं वहां से बिटिया को लेकर दोबारा घर की ओर रवाना हुए। इसी तरह दोपहर 2.15 बजे हेलिकॉप्टर से बिटिया अपने दादा के घर पहुंची। जहां इसके बाद सभी रस्में निभाई गई।