अपना खुद के घर का सपना संजोने वाले लोगों के लिए खुशखबरी है। सरकार मात्र 78 रूपए में घर बेच रही है। इतना ही नहीं बल्कि सरकार की तरफ से इस कीमत पर एक या दो नहीं बल्कि पूरे 25 हजार मकान बेचे जा रहे हैं। सरकार का इस योजना के पीछे का मकसद छोटे शहरों में आबादी बढ़ाने का है ताकि बड़े शहरों पर जनसंख्या का दबाव कम हो सके।

हालांकि यह योजना इटली सरकार की तरफ लाई गयी है। दक्षिणी इटली का ऐतिहासिक केंद्र और लिटिल इटली के रूप में चर्चित टारांटो देश का पहला ऐसा शहर है मात्र जहां 78 रुपए यानी एक यूरो में एक घर खरीदा जा सकता है। 

दरअसल 19वीं सदी में इटली के बंदरगाह वाले इस शहर की आबादी 40 हजार थी जो घटते-घटते महज 3000 तक रह गई। इस पुराने और ऐतिहासिक शहर की आबादी बढ़ाने के लिए काउंसिल के अधिकारियों ने सस्ते घर देने का ऑफर दिया है। इस स्कीम के तहत 25 हजार घरों को बेचा जा रहा है।

आपको बता दें कि इससे पहले 78 रुपए (एक यूरो) में घर बेचने का आइडिया सिसली की राजधानी पलेर्मो के गांगी शहर में 2011 में लागू किया गया था। इस स्कीम के तहत यहां ऐसे 150 से अधिक घरों को बेचा गया था। इन घरों को नए लोगों ने खरीदा था और कस्बा फिर आबाद हो गया था।

इसके अलावा 2019 में सिसली के बीवोना, साम्बुका और मुसोमेली गांव में भी ऐसे ही ऑफर दिए गए थे। इटली के उत्तर पश्चिम में लोकेना भी उन कस्बों में था, जहां नए घर लेकर बसने वालों के लिए तीन साल का भुगतान मात्र 7 लाख (9,000 यूरो) रुपए करना था।

इस स्कीम बारे में काउंसिल के अधिकारी फ्रांसेस्का विग्गिएनो का कहना है कि 78 रुपए में घर बेचे जाने की खबर पर अमेरिका के न्यूयॉर्क, मिलान और रोम शहरों से लोगों ने जानकारी मांगी है। शहर को पुर्नजीवित करने के लिए हाल ही इटली की सरकार ने टारांटो को 705 करोड़ (900 लाख यूरो ) रुपए दिए हैं। इसके तहत हम पुराने शहर को फिर से बसाने और विकसित करने के बारे में विचार रहे हैं। 1975 में शहर की एक पुरानी इमारत के गिरने से इसमें एक परिवार दबकर मर गया था। इसके अलावा, इल्बा स्टील प्लांट से होने वाले प्रदूषण के कारण भी लोगों में शहर का आकर्षण समाप्त हो गया था। हालांकि अधिकारी 2024 तक प्लांट को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की योजना बना रहे हैं।

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