असम में प्रतिबंधित उग्रवादी समूह नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ़ बोरोलैंड, ऑल बोडो स्टूडेंट यूनियन और केन्द्र सरकार के बीच एक समझौता होने जा रहा है। इस समझौते में केन्द्र की तरफ से गृह मंत्री अमित शाह, राज्य की ओर से राज्य के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनवाल और एनडीएफ़बी के चार धड़ों के शीर्ष नेतृत्व शामिल होंगे।

समझौते में अलग बोडोलैंड राज्य या केन्द्रशासित प्रदेश की मांग के बिना आदिवासियों को राजनीतिक और आर्थिक लाभ हासिल करने की बात होगी। इस बारे में जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि समझौता असम में रहने वाले बोडो आदिवासियों को कुछ राजनीतिक अधिकार और समुदाय के लिए कुछ आर्थिक पैकेज मुहैया कराएगा।


अधिकारी ने कहा कि गृहमंत्री समझौते को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने को लेकर बहुत उत्सुक हैं ताकि असम में बोडो उग्रवाद समाप्त किया जा सके और राज्य के बोडो बहुल क्षेत्रों में दीर्घकालिक शांति लौटे। समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले एनडीएफबी के चार धड़ों का नेतृत्व रंजन दाईमारी, गोविंद बासुमातरी, धिरेन बोरो और बी साओरायगरा द्वारा किया जा रहा है। 


एनडीएफबी के कुछ उग्रवादी उन 644 उग्रवादियों में शामिल थे जिन्होंने गत गुरुवार को गुवाहाटी में मुख्यमंत्री सोनोवाल के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। समझौते में सरकार द्वारा बोडो भाषा, संस्कृति और संबंधित मामलों की रक्षा सुनिश्चित किये जाने की उम्मीद है। साथ ही एक आयोग का गठन किये जाने की भी उम्मीद है जो बोडो लोगों को कुछ विशिष्ट राजनीतिक अधिकार मुहैया कराने के संबंध में असम में विभिन्न वर्गों के लोगों के विचार लेगी। यह हस्ताक्षर गत 27 वर्षों में होने वाला तीसरा बोडो समझौता है।

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