सिक्किम ट्री कंज़र्वेशन : सिक्किम सरकार ने लोगों को पेड़ बचाने और ज्यादा से ज्यादा मात्रा में पेड़ उगाने के लिए प्रोत्साहित करने का अनोखा तरीका निकाला है. पेड़ो के प्रति लोगों की संवेदनाओं को समझते हुए वहां कि सरकार ने लोगों से पेड़ों के साथ भाई-बहन के रिश्ते बनाने को कहा है. जिसे स्थानीय स्तर पर मिथ / मिट या मिटीनी के रूप में जाना जाता है। 

दियों पुरानी भारतीय संस्कृति में पेड़ पौधों को काफी महत्वपर्ण दर्जा दिया गया है. हिन्दु धर्म में तो कई तरह की पूजा पाठ में पेड़ पौधों का इस्तेमाल किसी भगवान की तरह होता है. पीपल, तुलसी, बरगद के पेड़ों पर अगर आप देश के किसी कोने में नजर दौड़ाएगें तो अक्सर आप इन्हें धागे चुनरियों से ढ़का हुआ ही पाएंगे। 

यह बात सच है कि आज हर पेड़ की अलग अलग धार्मिक महत्वता को समझते हुए हमने कई पेड़ पौधों से एक रिश्ता बना लिया है. और अब इसी बात का फायदा सिक्किम की प्रदेश सरकार ने पेड़ों के बचाव के लिए उठाया है। 

सरकार की तरफ से जारी अधिसूचना में यह कहा गया है कि कोई व्यक्ति अगर पेड़ को अपना बच्चा मानकर अपनाता है तो उसे दत्तक या एडॉपटड(Adopted) पेड़ कहा जाएगा. वहीं अगर कोई इंसान पेड़ को अपने रिश्तेदार के तौर पर अपनाता है तो उसे स्मृति(Smriti) पेड़ कहा जाएगा। 

पेड़ के साथ संबंध बनाने के लिए सरकार ने कुछ नियम कानून भी बनाए हैं. जैसे कि अगर कोई व्यक्ति ऐसे पेड़ के साथ अपना संबंध बनाना चाहता है जो उसकी जमीन पर ना होकर किसी और की जमीन पर है तो ऐसे में उसे उस भूमि मालिक की अनुमति लेकर दोनों के बीच एक कॉनट्रैक्ट साइन करना होगा। 

वहीं सार्वजनिक भूमि पर खड़े किसी पेड़ के साथ व्यक्ति को रिश्ता बनाने के लिए उसे उस विभाग से या एजेंसी से अनुमति लेनी होगी. इसके लिए उस व्यक्ति को सबसे पहले एक ऑफिशयल फार्म को भरना होगा जो सिक्किम वन विभाग के पास उपलब्ध रहेगा. इस फार्म के माध्यम से पेड़ों से संबंध बनाने वाला इंसान उसे कोई नाम देकर पंजीकृत कर सकता है। 

जानकारी के लिए बता दें कि सिक्किम वन वृक्ष (अमिटी एंड अवर्वेशन) नियम मिथ / मिट या मिटीनी के रूप में पंजीकृत किसी भी वृक्ष को गिराने या क्षति को पूरी तरह से निषिद्ध कर दिया गया है, और इस कानून का उल्लंघन किसी वन अपराध के रूप में माना जाएगा। 

सरकार की इस पहल के बारे में बात करते हुए प्रधान सचिव और मुख्य वन संरक्षक थॉमस चांडी ने द हिंदू को बताया कि इस अधिसूचना जारी करने का विचार सर्वप्रथम मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग ने दिया था। 

इसके पीछे उनका तर्क था कि मानव और प्रकृति, विशेष रूप से वृक्षों के बीच रिश्ते बनाने की परंपरा हमारे यहां बहुत पुरानी है. इस वजह से हम लोगों का पेड़ों से एक रिश्ता बनवाकर उन्हें कटने से रोक सकते हैं। 

श्री चांडी ने बताया कि जल्द ही सिक्किम सरकार द्वारा आयोजित आगामी परवरन महोत्सव में हम इस मुद्दे एक प्रमुख तरीके से उठाएंगे. हाल ही में भारत के वन सर्वेक्षण के मुताबिक 2015 में सिक्किम का वन क्षेत्र राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 47.80% पाया गया है।