माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर और केंद्र सरकार के बीच तल्खी बढ़ती जा रही है। सरकार ने कंपनी से ‘भड़काऊ सामग्री’ वाले अकाउंट्स को सेंसर करने की मांग की थी। अब सरकार ट्विटर पर सख्त रवैया अपना रही है। खबर है कि आदेशों का पालन नहीं करने की स्थिति में ट्विटर के कुछ टॉप अधिकारियों को गिरफ्तार भी किया जा सकता है। 

सरकार ने साफ कर दिया है कि ऐसे अकाउंट्स के खिलाफ कार्रवाई पर किसी भी तरह की समझौता नहीं हो सकता है। सरकार ने कहा है कि इस मामले में ‘सब्र खत्म होता जा रहा है।’ भारत ने बुधवार को ट्विटर को कंटेट हटाने के संबंध में फटकार लगाई थी। सरकार ने किसान आंदोलन के बारे में दुष्प्रचार और भड़काऊ बातें फैला रहे अकाउंट और हैशटैग के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने में ट्विटर के देरी करने पर ‘कड़ी नाराजगी’ जाहिर की। 

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि कंपनी के अपने भले ही कोई नियम हों, लेकिन उसे देश के कानूनों का पालन करना ही चाहिए। वहीं सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार ट्विटर इस मामले में अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है। कंपनी ने इसके लिए अभिव्यक्ति की आजादी का हवाला दे सकती है। कंपनी ने आंशिक रूप से आदेश मानते हुए सरकार की तरफ से बताए गए करीब आधे अकाउंट्स बंद कर दिए हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव ने ग्लोबल पब्लिक पॉलिसी ट्विटर के वाइस प्रेसिडेंट मोनीक मेश और डिप्टी जनरल काउंसल और वाइस प्रेसिडेंट लीगल जिम बेकर के साथ वर्चुअल तरीके से बैठक की थी। 

इस बैठक के बाद मंत्रालय की तरफ से एक बयान जारी किया गया था। बयान में कहा गया जिस तरह से ट्विटर ने अनिच्छा, अनजाने और देरी के साथ आदेश के खास हिस्सों का पालन करने के मामले में सचिव ने ट्विटर नेतृत्व को लेकर काफी निराशा जताई है। इधर केंद्र सरकार और ट्विटर के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई वर्चुअल मीटिंग में सरकार ने कैपिटल हिल हिंसा और ग्रेटा थनबर्ग के टूलकिल का जिक्र कर ट्विटर को फटकारा है। भारत सरकार ने कहा कि ट्विटर को भारत के कानूनों का पालन करना होगा और अशांति फैलाने वालों पर केंद्रित अभियानों पर कड़ी कार्रवाई करनी होगी। आईटी सचिव अजय साहनी ने ट्विटर के प्रतिनिधियों को दो टूक कहा कि भारत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और आलोचना का सम्मान करता है क्योंकि ये हमारे लोकतंत्र का हिस्सा है। इस वर्चुअल मीटिंग में ट्विटर की ओर से वाइस प्रेसिडेंट ग्लोबल पब्लिक पॉलिसी, मॉनिक मेश और जीम बेकर, डिप्टी जनरल काउंसिल और वाइस प्रेसिडेंट लीगल उपस्थित थे।