खाद्य मंत्रालय का कहना है कि खरीफ सत्र के दौरान कम पैदावार के अनुमान और गैर-बासमती चावल के निर्यात में 11 प्रतिशत की वृद्धि को देखते हुए चावल की कीमतों में बढ़ोतरी का रुख आगे भी जारी रह सकता है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारत के चावल निर्यात नियमों में हालिया बदलावों ने निर्यात के लिए उपलब्धता को कम किए बिना घरेलू कीमतों को काबू में रखने में मदद की है। इस महीने की शुरुआत में सरकार ने टूटे चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था और गैर-बासमती चावल पर 20% निर्यात शुल्क लगाया था।

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भारत की तरफ से न‍िर्यात पर रोक से चीन में खाद्य संकट पैदा हो सकता है। सरकार के इस फैसले से कीमत कम होने का अनुमान जताया जा रहा था, लेक‍िन अब सरकार की तरफ से दी गई जानकारी में कीमत बढ़ने के आसार जताए गए। चीन के बाद में भारत चावल का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। ग्लोबल मार्केट में भारत के चावल का हिस्सा 40 फीसदी है। भारत ने वित्तवर्ष 2021-22 में 2.12 करोड़ टन चावल का निर्यात किया है। इसमें 34.9 लाख टन बासमती चावल था। 

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आपको बता दें भारत में चालू खरीफ सीजन में धान फसल का रकबा काफी घट गया है। घरेलू मार्केट में सप्लाई को बढ़ाने के लिए सरकार ने यह फैसला लिया है। मंत्रालय ने कहा कि पोल्ट्री और पशुपालन किसान फीड सामग्री में कीमतों में बढ़ोतरी के कारण सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं, ऐसा इसलिए है क्योंकि पोल्ट्री फीड के लिए लगभग 60-65 प्रतिशत इनपुट लागत टूटे चावल से आती है।