झारखंड के दुमका जिले के जड़मुंडी गांव के एक शिक्षक की आज चहुंओर तारीफ हो रही है। डुमरथार गांव के इस शिक्षक की पहल की सोशल मीडिया पर भी तारीफ हो रही है।  

जड़मुंडी के डुमरथार गांव के सरकारी स्कूल के इस शिक्षक ने के दौरान बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसलिए उनके घरों पर ही पढ़ाई का इंतजाम करा दिया. शिक्षक का नाम सपन कुमार बताया जा रहा है, जिन्होंने गांव में बच्चों के घरों की दीवार पर ब्लैकबोर्ड बनवा दिए, ताकि पढ़ाई बाधित न हो।  

 आपको बता दें कि दुमका के कलेक्टर ने जब शिक्षा के इस अनोखे प्रयोग की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की, तो नीति आयोग ने भी इसकी सराहना की।  नीति आयोग ने इन तस्वीरों को री-ट्वीट कर शिक्षक के जज्बे को सराहा। 

कोरोना काल में बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल हुआ तो ग्रामीणों और इस शिक्षक ने इस तरह का अनोखा प्रयोग करने की योजना बनाई।  शिक्षक की पहल और ग्रामीणों के सहयोग से जड़मुंडी के डुमरथार में आज बच्चे अपने घरों में रहते हुए भी पढ़ाई से वंचित नहीं हैं।  शिक्षक सपन कुमार हाथों में माइक लेकर दूर-दूर तक बैठे बच्चों को पढ़ाते हैं। 

झारखंड में स्कूली शिक्षा को लेकर ऐसा प्रयोग पहली बार हुआ हो, यह नहीं है।  जड़मुंडी के डुमरथार से पहले भी संताल परगना के इलाके में दूरदराज के गांवों में स्थित बच्चों को पढ़ाने के लिए लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करने का प्रयोग हो चुका है।  डुमरथार के शिक्षक सपन कुमार ने इससे आगे बढ़कर यह अनोखा प्रयोग कर दिखाया।