'नल से जल' की सुविधा के साथ शुद्ध जल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए देशभर में टेस्टिंग लैब की नेटवर्किंग की जाएगी। इससे उपभोक्ता देश के किसी भी हिस्से से अपने यहां सप्लाई के पानी का परीक्षण करा सकेगा। 

प्रदूषित जल की आपूर्ति होने पर उसकी जांच रिपोर्ट संबंधित विभाग के पास भी भेजी जाएगी, ताकि समय रहते वहां शुद्ध जलापूर्ति की जा सके। पानी के कनेक्शन के साथ आधुनिक सेंसर जोड़ा जाएगा जिससे पानी की गुणवत्ता और मात्रा का आकलन किया जा सकेगा।

जलापूर्ति के लिए नल कनेक्शन पहुंचाने के साथ उपभोक्ताओं को अन्य सहूलियतें भी देने के उपाय शुरू कर दिए गए हैं। इसके पहले चरण में जल की गुणवत्ता जांचने के लिए देशभर में कुल 2,000 टेस्टिंग लैब स्थापित कर दी गई हैं।

इन लैबों से प्राप्त टेस्ट रिपोर्ट उपभोक्ताओं को आनलाइन भेजने के साथ ही ये संबंधित पब्लिक हेल्थ इंजीनियर के पास भी पहुंच जाएगी। ताकि पानी की गुणवत्ता में तत्काल सुधार किया जा सके। बताया जाता है कि इन टेस्टिंग लैब में कोई भी उपभोक्ता अपने नल के पानी के सैंपल की जांच करा सकता है, जिसके लिए बहुत कम शुल्क लिया जाएगा।

केंद्र सरकार ने वर्ष 2024 तक देश के सभी घरों तक शुद्ध जल आपूर्ति करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्ष 2019 से ही चल रहे ग्रामीण जल जीवन मिशन का विस्तार कर दिया गया है। इसमें शहरी क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को भी शामिल कर लिया गया है। आगामी वित्त वर्ष 2020-21 के आम बजट में पौने तीन लाख करोड़ का भारी भरकम वित्तीय प्रविधान किया गया है।

प्रत्येक ग्रामीण घर में शुद्ध जल आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए टे¨स्टग लैब राज्य मुख्यालय, जिला, ब्लाक व तहसील में तो होंगी ही, इसके अलावा इनका और भी विस्तार किया जाएगा। जल जीवन मिशन के तहत उन क्षेत्रों में पानी कनेक्शन देने को प्राथमिकता दी जा रही है जिन क्षेत्रों का भूजल प्रदूषित है। मिशन के तहत अब तक आर्सेनिक और फ्लोराइड प्रभावित 27,544 बसावटों को पानी का कनेक्शन देकर वहां शुद्ध जल की आपूर्ति शुरू कर दी गई है।

देश में अब तक कुल 7.11 करोड़ ग्रामीण घरों में नल से जल पहुंचाने में सफलता मिली है। ग्रामीण क्षेत्रों के हर स्कूल, ग्राम पंचायत, हेल्थ केयर सेंटर व आंगनवाड़ी केंद्र के साथ हर घर तक जल आपूर्ति की योजना को 2024 तक पूरा करना है। सेंसर आधारित जलापूर्ति का पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है जिसे जल्द ही पूरे देश में लागू किया जाएगा।