ममता बनर्जी के राज में पश्चिम बंगाल की हर सरकारी चीज का रंग नीला-सफेद है जिसके पीछे का राज सामने आ गया है। तृणमूल कांग्रेस की नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्ममंत्री ममता बनर्जी ने शहर की हर सरकारी चीज का रंग बदलवा दिया।

पश्चिम बंगाल की बसें हों या फिर डिवाइडर, सरकारी इमारतें भी नीला-सादा यानी नीले और सफेद रंग में ढक दी गईं। दरअसल, 34 वर्षों तक वाम दल के शासन के अंत के बाद ममता बनर्जी ने एक-एक कर चीजों का रंग बदलना शुरू किया। कुछ लोगों का ऐसा भी मानना है कि ममता बनर्जी वाइट साड़ी ब्लू बॉर्डर के साथ पहनती हैं। यह रंग उन्हें बहुत पसंद है। वह मानती हैं कि यह आसमान का रंग है। आसमान सीमाएं नहीं जानता। इसी थिअरी के साथ ऐसा कुछ प्रयोग किया गया।

2015 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नीले और सफेद रंग को अपनी शक्ति के रूप में प्रदर्शित करने के बीच एक विवाद भी पैदा हुआ था। कोलकाता के मकानों को नीला और सफेद रंग देने की कोशिश की गई थी। कोलकाता नगर निगम की ओर से एक नोटिस जारी की गई थी। इसमें कहा गया था कि जो लोग अपने मकानों का रंग नीला और सफेद रखते हैं, उन्हें एक साल तक के संपत्ति कर पर रियायत देने का ऐलान था। 

नगर निगम के इस नोटिस को अधिवक्ता शुभाशीष चक्रवर्ती ने असंवैधानिक बताया था। इसके साथ ही कोलकाता हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। बता दें कि पश्चिम बंगाल के सरकारी स्कूलों को भी यही रंग दिया गया है। टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो चुके शीलभद्र दत्ता कहते हैं, 'पूरे प्रदेश की हर इमारत को इसी रंग से रंगने की तैयारी थी। हालांकि, कोलकाता में प्राइवेट कॉलोनियों के मालिकों ने ही यह मानने से इनकार कर दिया। रंगाई के बीच पेंट की खरीद में भी बहुत बड़ा भ्रष्टाचार हुआ है।'