पूर्वोत्तर राज्य असम के प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में गोपीनाथ बोरदोलोई को जाना जाता है।  बोरदोलोई स्वतंत्रता सेनानी भी थे जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में गांधी के साथ काम किया और देश को आजादी दिलाने में प्रमुख भूमिका निभाई।

बोरदोलोई ऐसे स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने भारतीय स्वाधीनता आन्दोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद मुख्यमंत्री बनने पर उन्हें आधुनिक असम का निर्माता जैसे नाम से भी पुकारा गया। अंग्रेजो से देश आजाद होने के बाद उन्होंने गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल के साथ मिलकर राज्य के एकीकरण के लिए अथक प्रयास किया।

गोपीनाथ बोरदोलोई का जन्म 6 जून, 1890 को असम के नौगांव जिले के रोहा गांव में हुआ था। उन्होंने गुवाहाटी के ‘कॉटन कॉलेज’ से सन 1907 में मैट्रिक की परीक्षा पास की। इसके बाद उन्होंने 1909 में इण्टरमीडिएट की परीक्षा पास की। इण्टरमीडिएट के बाद वो उच्च शिक्षा के लिए कोलकाता चले गए जहां से उन्होंने बीए और एमए की पढ़ाई की। इसके बाद बोरदोलोई ने कानून की पढ़ाई की और वापस गुवाहाटी वापस लौट आए तथा 1917 में वकालत शुरू की।

इसी बीच सन 1922 में ‘असम कांग्रेस’ की स्थापना हुई तथा बोरदोलोई स्वयंसेवक के रूप में कांग्रेस में शामिल हो गए। इसके बाद गांधीजी के आह्वान पर वो अपनी वकालत छोड़कर असहयोग आन्दोलन में कूद पड़े। इस वजह से उनको कई बार जेल भी जाना पड़ा। हालांकि आखिर में देश को आजादी मिली लेकिन इसके बाद भी असम को तोड़ने वाली ताकतें हावी होती जा रही थी। इन्हीं को धता बताते हुए बोरदोलोई ने असम को भारत में विलय होने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद  वो 11 फरवरी 1946 से लेकर 6 अगस्त 1950 तक वो असम के मुख्य मंत्री रहे।