जम्मू कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने सोमवार को जोर देते हुए कहा कि कश्मीर घाटी में भारी संख्या में विदेशी आतंकवादी मौजूद हैं, लेकिन वे अभी अपनी गतिविधियों को पूरे तौर पर अंजाम नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि नियंत्रण रेखा पर कड़ी निगरानी और पाकिस्तान की ओर से संघर्ष विराम से कश्मीर घाटी में हिंसक घटनाओं में कुछ कमी आई है। 

उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा कि इस वर्ष अब तक बारामूला जिले के सोपोर में दो विदेशी आतंकवादी मारे गए हैं और ये दोनों ही लश्कर ए तैयबा से जुड़े थे जो स्पष्ट तौर पर दर्शाता है कि कश्मीर घाटी में विदेशी आतंकवादी मौजूद है, लेकिन ये अभी अपनी गतिविधियों को पूरी तौर पर अंजाम नहीं दे रहे हैं । उन्होंने कहा कि इस वर्ष नियंत्रण रेखा पर कड़ी सतर्कता से घुसपैठ की घटनाओं में काफी कमी आई है और भारत तथा पाकिस्तान की सेनाओं की ओर से संघर्षविराम का पालन करने से घाटी में इसका सकारात्मक असर पड़ा है, लेकिन यह दावा करना गलत होगा कि घाटी में कोई विदेशी आतंकवादी मौजूद नहीं है। यहां कश्मीर घाटी में उनकी संख्या काफी है लेकिन हमारे पास उनके बारे में पूरी जानकारी है और आने वाले दिनों में सुरक्षा बल उनके खिलाफ जोरदार अभियान चलाएंगे। 

श्रीनगर में सक्रिय आतंकवादियों की संख्या के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए सिंह ने कहा कि शहर में उनकी संख्या अधिक नहीं है और ये कुछ ही हैं जो शहर और आसपास के जिलों में घूम रहे हैं लेकिन सुरक्षा बलों की उनकी गतिविधियों पर पूरी नजर है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बल श्रीनगर में आतंकवादियों के खिलाफ आने वाले दिनों में जोरदार अभियान चलाएंगे। पुलिस महानिदेशक ने सोपोर में हुई मुठभेड की जानकारी देते हुए कहा कि उसमें लश्कर के शीर्ष कमांडर और एक विदेशी आतंकवादी समेत कुल तीन आतंकवादी मारे गए थे और ये तीनों ही वांछित थे। इनमें से एक लश्कर कमांडर मुदासिर पंडित के खिलाफ विभिन्न थानों में पुलिस कर्मियों और नागरिकों की हत्याओं को लेकर 18 मामले दर्ज थे। 

विदेशी आतंकवादी की पहचान अब्दुल्ला उर्फ असरार के तौर पर हुई है जो पाकिस्तान का रहने वाला था और वह पंडित के साथ मिलकर काफी लंबे समय से अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था जबकि तीसरे आतंकवादी की पहचान खुर्शीद अहमद मीर के रूप में हुई है तथा उसके खिलाफ भी छह प्राथमिकी दर्ज थीं। यह समूह सोपोर में दो बड़े हमलों को अंजाम देने की घटनाओं में शामिल था। पहली घटना 29 मार्च को हुई थी जिसमें दो निगम पार्षद और एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई थी तथा दूसरी घटना 12 जून को हुई थी जिसमें दो पुलिस कर्मियों और दो नागरिकों की सोपोर के मुख्य बाजार में गोली मार कर हत्या कर दी गई थी।