मार्केट में सोने के भाव एकबार फिर गिरने लगे हैं। पिछले साल अगस्त के मुकाबले सोना 10000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो चुका है। हाजिर बाजार में सोना 46000 के करीब आ चुका है। ऐसे में माना जा रहा है कि अब इसकी कीमतें बढ़ेंगी।

साल 2020 में महामारी की घोषणा के बाद सोने के भाव में एकाएक तेजी आई। सोना 28000 से बढ़कर अगस्त 2020 में 56000 को भी पार कर गया। सोने का भाव 56000 के लेवल पार करने के बाद, जैसे-जैसे वैक्सीन और वैक्सीनेशन की खबरें आने लगीं, इसमें मुनाफा वसूली चालू हो गई। इसकी वजह से सोने का लेवल 45000-46000 तक आ गया। यह पहले भी हुआ और अब भी हो रहा है।

सोने की कीमत 45000 के नीचे नहीं आने के अन्य कारणों के अलावा जब तक कोरोना खत्म नहीं होगा, तब तक गोल्ड एक सुरक्षित निवेश के रूप में बना रहेगा। दुनिया भर के देशों की अर्थव्यवस्था की हालत अभी भी ठीक नहीं है। अभी मध्य-पूर्व में तनाव बरकरार है, अफगानिस्तान को लेकर अमेरिका और चीन में टेंशन बना हुआ है। यह स्थित गोल्ड को सपोर्ट करती है। जॉब डेटा को देखते हुए डॉलर इंडेक्स में कुछ तेजी जरूर आई है, लेकिन अभी भी 93 के आस-पास बना हुआ है। डॉलर में अगर गिरावट आई तो गोल्ड में तेजी देखने को मिलेगी।

अर्थव्यवस्था को बूस्ट करने के लिए भारत हो या अमेरिका या फिर ब्रिटेन या कोई और देश, यहां की सरकारें विभिन्न पैकेजों के रूप खूब पैसा डाल रही हैं, जिसका असर महंगाई पर पड़ता है। इन्फ्लेशन गोल्ड की सबसे अच्छी दोस्त होती है। यानी आप ऐसे समझिए। गोल्ड को लेकर पिछले साल जैसे हालात थे कमोवेश इस साल भी वैसे ही हैं। हलांकि पिछले दो-तीन महीनों में सोने के रेट में आई गिरावट डराती जरूर है, लेकिन लांग टर्म में सोने में निवेश फायदा देगा। क्योंकि बॉन्ड यील्ड में भी ठहराव है। इक्विटी मार्केट ओवर वैल्यूड है । ऐसे में सोने के प्रति लोगों का रुझान बढ़ सकता है।

ऐसे में सोने में निवेश का यह ठीक समय है। अगर महीने-दो महीने के लिए सोने में पैसा लगाने के लिए आप सोच रहे हैं तो आप इससे दूर ही रहें, लेकिन डेढ़-दो साल के लिए सोने में निवेश कर रहे हैं तो यह बिल्कुल सही समय हैं। अगले छह महीने में सोना 50000 और एक साल में यह 54000 का लेवल तोड़ सकता है। बेहतर होगा सोने में SIP की तरह निवेश कर सकते हैं।