इस बार धनतेरस के वक्त सोने की कीमतें 40,000 रुपये के पार जा सकती हैं। इसके साथ ही चांदी की कीमत भी 48,500 रुपये प्रति किलो के पास जा सकती है। हालांकि घरेलू मार्केट में ज्यादा मांग नहीं है, मगर इंटरनेशनल लेवल पर सोना और चांदी में बढ़ते निवेश के चलते दोनों के दामों पर दबाव बढ़ रहा है। धनतरेस के समय भारत में सोने और चांदी की खरीदारी सबसे अधिक होती है। माना जा रहा है कि पूरे साल में गोल्ड और सिल्वर की जितनी खरीदारी होती है, उसकी 30 फीसदी खरीदारी अक्टूबर से शुरू होने वाले त्योंहारी सीजन में होती है। 

हालांकि इस समय पूरी दुनिया में इकॉनमी में स्लोडाउन की बात कही जा रही है। इस वजह से शेयर मार्केट में अनिश्चितता का माहौल है। ऐसे में इंटरनेशनल मार्केट में निवेशक सोना और चांदी में निवेश कर रहे हैं। एक समय इंटरनेशनल मार्केट में सोना 1,000 से 1,200 डॉलर प्रति औंस (32 ग्राम) से नीचे चला गया था, लेकिन अब फिर से यह 1,500 डॉलर प्रति औंस के ऊपर चल रहा है। भारत अपनी खपत का 90 फीसदी से अधिक सोना आयात करता है। इस वजह से गोल्ड की कीमतों में तेजी होना लाजिमी है।

इस साल भी धनतेरस के समय घरेलू बाजार सोने की मांग जबरदस्त रूप से बढ़ जाएगी। इस वजह से सोने की कीमत में दबाव बनना स्वाभाविक है। हालांकि पिछले दिनों इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमतों में गिरावट आई थी, उससे गोल्ड और सिल्वर नीचे चले गए। लेकिन यदि पहले की तेजी यथावत रहती तो सोना इस बार तेजी का रिकॉर्ड बना सकता है।