असम के गोलाघाट में लोग अज्ञानता की वजह से 10 रुपए के सिक्कों को लेकर परेशान है। जिले में कहीं भी 10 रुपए के सिक्के स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। दुकानदार,व्यापारी, टेम्पो ड्राइवर, रिक्शाचालक 10 रुपए के सिक्के नहीं ले रहे हैं। इससे लोगों में डर व्याप्त हो गया है। समाचार पत्र सेंटिनेंटल के मुताबिक गोलाघाट में एक राष्ट्रीय बैंक भी 10 रुपए के सिक्के स्वीकार नहीं कर रहा है जबकि हालांकि आरबीआई की गाइडलाइंस में साफ साफ कहा गया है कि 10 रुपए के सिक्के लीगल टेंडर है। कोई भी इन्हें लेने से इनकार नहीं कर सकता। जो इन सिक्कों को लेने से मना करते हैं उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
उधर कछार जिला प्रशासन ने 10 रुपए के सिक्के लेने से इनकार करने वालों के खिलाफ  कड़ा रूख अपनाया है। कछार जिला प्रशासन, बैंकों, व्यापारियों और कछार पुलिस की मीटिंग हुई। बैठक में तय हुआ कि 10 रुपए के सिक्के लेने से मना करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। बैंकों ने मीटिंग में कहा कि लोगों को ट्रांजेक्शंस के लिए 10 रुपए के सिक्कों के इस्तेमाल से नहीं घबराना चाहिए क्योंकि ये सिक्के लीगल टेंडर हैं। कछार के डिप्टी कमिश्नर एस.विश्वनाथन ने कहा,10 रुपए के सिक्के पूरी तरह से वैध हैं। सिक्कों को रिजेक्ट करने की कोई वजह नहीं है। अगर कोई सिक्क को लेने से मना करते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। डीएसपी एसके दास को इस मसले पर निगरानी के लिए इंचार्ज ऑफिसर के रूप में नियुक्त किया गया है। डीएसपी(हेड क्वाटर्स)एसके दास ने बताया कि अभी तक तो कुछ मौखिक शिकायतें मिली है। हमने शिकायतकर्ताओं को पूरे जिले में संबंधित पुलिस आउटपोस्ट्स में गवाह के साथ अपनी शिकायतें दर्ज कराने को कहा है।
कुछ माह पहले इस तरह की अफवाह फैली थी कि 10 रुपए के सिक्के बंद हो गए हैं। आरबीआई ने इन्हें अवैध करार दिया है। इसके बाद दुकानदारों, व्यापारियों, रिक्शाचालकों ने 10 रुपए के सिक्के लेने से मना कर दिया। आरबीआई पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि 10 रुपए के सिक्कों पर कोई बैन नहीं लगाया गया है। आरबीआई ने पिछले साल 20 नवंबर को नोटिफिकेशन जारी करते हुए स्पष्ट किया था कि 10 रुपए के सिक्के लीगल टेंडर है। आरबीआई ने 2007 में 10 रुपए के सिक्के मार्केट में उतारने का फैसला किया था जबकि भारतीय करेंसी का चिन्ह 15 जुलाई में ऐलान किया गया। ऐसे में वर्ष 2000 से पहले के सिक्कों पर भारतीय करेंसी के चिन्ह हो नहीं सकते। आरबीआई की ओर से जारी सभी सिक्के असली हैं और बैंक भी इन्हें स्वीकार कर रहे हैं। आरबीआई के अधिकारी का कहना है कि अगर कोई बैंक 10 रुपए के सिक्के लेने से मना करता है तो ग्राहक आरबीआई में उसकी शिकायत कर सकता है।