कोरोना काल में गंगा नदी में मिली लाशों ने सरकार की हालात टाइट कर दी है। कोरोना मरीजों की लाशें गंगा में 150 से ज्यादा मिली है। बिहार के बक्सर और उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में यह लाशें मिली है। इसी तरह से गंगा किनारें कई लाशों को दफ्नाने का भी मामला सामने आया है। इसी पर यूपी सरकार ने सख्ती दिखाते हुए कड़ा फैसला लिया है। योगी सरकार ने शवों को गंगा नदी में प्रवाहित करने से होने वाले प्रदूषण को देखते हुए इस पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।


सीएम योग के आदेशानुसार सख्ती से पालन कराने के लिए नदियों के किनारे SDRF और जल पुलिस की टीमें भी लगातार पेट्रोलिंग कर रही हैं, ताकि लोग शवों को नदी में प्रवाहित न कर सकें। आईजी (प्रयागराज रेंज) केपी सिंह ने कहा कि “जो भी शव कोरोना काल में नदियों के किनारे दफ्नाये गए हैं वो कोविड मरीजों के कतई नहीं हैं, बल्कि ये शव सामान्य मौतों के ही हैं ”। आईजी ने लोगों से अपील भी की है कि “अगर उनके यहां शवों को दफ्नाये जाने की परंपरा है तो अपने खेतों या गांव सभा की जमीनों में शवों को दफन करें ”।  

दाह संस्कार करने में आर्थिक समस्या आ रही है तो उसकी भी पुलिस और प्रशासन की ओर से मदद की जा रही है। केपी सिंह ने बताया कि गंगा किनारे शवों को दफ्नाये जाने से बारिश में जलस्तर बढ़ने पर शवों के बाहर आने की आशंक बनी रहेगी तो शवों को गंगा किनारे ना दफ्नाएं। आईजी ने बताया कि श्मशान घाटों पर ज्यादा पैसे न लिए जाएं, इसके लिए लकड़ियों के भी रेट तय कर दिए गए हैं।