चीन की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनियों में से एक एवरग्रांड ग्रुप पर इन दिनों संकट के बादल छा गए हैं। इस ग्रुप पर दिवालिया होने का खतरा मंडरा रहा है और इससे वैश्विक बाजार हिल गया है। बाजार में आई इस गिरावट से दुनिया के अमीर लोगों को 9,942 अरब रुपए का नुकसान हुआ है।

टेस्ला के मालिक एलन मस्क की नेटवर्थ सबसे ज्यादा 7.2 अरब डॉलर यानी करीब 53 हजार करोड़ रुपए और अमेजन के जेफ बेजोस को 5.6 अरब डॉलर यानी करीब 41 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। इसके अलावा एवरग्रांड के संस्थापक और चेयरमैन हुई का यान की संपत्ति में भी जबरदस्त गिरावट आई है और वह अब 2017 के सबसे ऊंचे 42 अरब डॉलर यानी करीब 3 लाख करोड़ रुपए से 7.3 अरब डॉलर मतलब करीब 54 हजार करोड़ रुपए की नेटवर्थ पर रह गए हैं।

दुनियाभर के शेयर बाजारों को एवरग्रांड संकट को लेकर हाई अलर्ट पर रखा गया है। एवरग्रांड की शुरुआत 1996 में एक बोतलबंद पानी बेचने की कंपनी के तौर पर हुई थी। इस कंपनी ने रियल एस्टेट में उतरने के साथ ही मध्यमवर्गीयों के लिए जबरदस्त स्कीम्स उतारीं और इतने सालों में चीन के रियल एस्टेट मार्केट की अग्रणी कंपनी बन गई। मौजूदा समय में एवरग्रांड चीन के पूरे रियल एस्टेट बिजनेस का दो फीसदी हिस्सा नियंत्रित करती है। कंपनी के पास चीन के 280 शहरों में 1300 से ज्यादा प्रोजेक्ट्स हैं। यह चीन की एक प्रोफेशनल फुटबॉल टीम ग्वांगझू फुटबॉल क्लब पर भी मालिकाना हक रखती है।

कंपनी ने रियल एस्टेट मार्केट में मध्यमवर्ग के बीच अच्छी पहचान बनाई। हालांकि, जबरदस्त ग्रोथ के दौरान कंपनी पर 300 अरब डॉलर से ज्यादा का कर्ज हो गया। इसी साल जब चीन ने जब अपनी डिजिटल अर्थव्यवस्था और डिजिटल एजुकेशन जैसे सेक्टरों पर पाबंदियां लगाईं, तब रियल एस्टेट सेक्टर में भी यह डर फैल गया कि चीन कर्ज को सीमित करने के लिए इस पर एक सीलिंग तय कर सकता है। पिछले साल भी चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने रियल एस्टेट मालिकों के लिए नियम बनाए थे, जिसके तहत उन्हें मिलने वाले कर्ज पर नियंत्रण लगाया जाना तय किया गया। इसी डर के माहौल के बीच एवरग्रांड ने अपने कारोबार को बेचना शुरू कर दिया। लेकिन कोरोना महामारी की वजह से चीन के प्रॉपर्टी मार्केट में छाई सुस्ती के चलते कंपनी को अपनी संपत्तियां बड़ी छूट के साथ बेचनी पड़ीं। 

इससे कंपनी रकम जुटाने में तो सफल हुई, लेकिन 22 लाख करोड़ रुपए का कर्ज चुकाना तो दूर, कंपनी को इस कर्ज पर पैदा हुए 8.4 करोड़ डॉलर यानी करीब 618 करोड़ रुपए के ब्याज को चुकाने में भी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। जुटाई गई रकम अब तक सिर्फ कंपनी के बिजनेस को चलाते रखने के काम आई है। कंपनी ने 171 घरेलू बैंकों और 121 वित्तीय संस्थाओं से कर्ज लिया है। कंपनी में फिलहाल 2 लाख कर्मचारी काम करते हैं। ये कंपनी चीन में हर साल करीब 38 लाख रोजगार भी पैदा करती है। ऐसे में कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस कंपनी को बचाने में चीन की सरकार आगे आ सकती है।