दुनियाभर मे कोरोना के खिलाफ  टीकाकरण का अभियान चलाया जा रहा है। लोगों को कोरोना के खिलाफ शरीर को मजबूत बनाने के लिए वैक्सीन लगाई जा रही है। वैक्सीन के दो डोज लगाए जा रहे हैं। भारत देश की बात करें तो यहां स्वदेशी दो वैक्सीन है कोवैक्सीन और कोविशिल्ड। पहले कोवैक्सीन की डोज दी जा रही है और फिर दूसीर डोज कोविशिल्ड की दी जा रही है।

देश में पहले 30 दिन के गैप पर दूसरा डोज दिया जा रहा था लेकिन अब केंद्र सरकार ने दूसरे डोज के लिए 90 दिन का गैप कर दिया है। वैक्सीन के इसी गैप पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के चीफ मेडिकल एडवाइजर डॉक्टर एंथॉनी फाउची ने वैक्सीनेशन डोज के बीच गैप बढ़ाने पर सवाल खड़े कर दिए हैं।


गैप बढ़ाने से लोगों में इंफेक्शन


अमेरिकी फाउची ने बताया कि वैक्सीन के बीच गैप बढ़ाने से लोगों में इंफेक्शन फैलने का खतरा बढ़ेगा। इससे लोगों की जान को खतरा हो सकता है। डॉ. फाउची ने कहा था, 'फाइजर जैसी mRNA वैक्सीन की दोनों डोज के बीच 3 हफ्तों का और मॉडर्ना की दोनों डोज के बीच चार हफ्तों का गैप होना जरूरी है। ब्रिटेन ने वैक्सीनेशन डोज के बीच गैप बढ़ाने से लोगों में संक्रमण का खतरा पहले से कहीं ज्यादा बढ़ा है।


गैप को कम करने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन

फाउची ने ये भी माना की सप्लाई की दिक्कत होने पर अक्सर डोज के बीच गैप बढ़ाना जरूरी हो जाता है। फाउची के सवाल का जबाव देते हुए नीति आयोग के मेंबर डॉ. वीके पॉल ने कहा, 'कोविशील्ड वैक्सीन के दोनों डोज के बीच अचानक गैप बढ़ने से लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। वैक्सीन डोज के बीच गैप को कम करने के लिए वैज्ञानिक अध्ययनों की जरूरत है।