केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एनआरसी पर संसद में बुधवार को दिए गए बयान पर सियासत गरमा उठी है। इस मसले पर पोल स्ट्रेटजिस्ट और जदयू उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर के ट्वीट पर केंद्रीय मंत्री और भाजपा के फायरब्रांड नेता गिरिराज सिंह ने पलटवार किया। गिरिराज सिंह ने कहा कि अमित शाह जब बोलते हैं तो बहुतों को बुरा लगता है। गिरिराज सिंह ने प्रशांत किशोर का नाम लिए बिना कहा कि अवैध से किसी को प्रेम क्यों है। बता दें कि किशोर ने ट्वीट करते हुए एनआरसी पर गृह मंत्री के बयान को लेकर सवाल खड़े किए थे।

गिरिराज सिंह ने कहा कि सहमति असहमति का सवाल कहां उठता है। कहा , एनआरसी से उन्हें निकाला जाएगा जो अवैध हैं। अवैध लोगों को देश में रहने का अधिकार नहीं है। भारत कोई धर्मशाला नहीं है। इसे लेकर उन्होंने ममता बनर्जी पर भी निशाना साधा। कहा कि जब बोलता हूं तो बहुतों को बुरा लगता है। कोई कहता है, हम अपने राज्य में नहीं लागू होने देंगे। लेकिन गृह मंत्री का बयान देशहित में है। कहा कि बिहार, बंगाल में जहां कहीं घुसपैठिए का दबाव दिखता है, वहां एनआरसी लागू होनी चाहिए। गिरिराज सिंह ने कहा कि इंदिरा गांधी में इच्छा शक्ति नहीं थी। इंदिरा गांधी ने 1971 में असम में कहा था कि घुसपैठियों को रखने की ताक़त हमारे पास नहीं है। लेकिन वोट के सौदागरों के आगे वह झुक गई।गृह मंत्री अमित शाह के बयान के बाद प्रशांत किशोर ट्वीट कर मामले को तूल दे दिया था।उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा कि पंद्रह से अधिक राज्यों में गैरबीजेपी सीएम हैं। ऐसे राज्यों में देश की 55 फीसदी से अधिक आबादी बसती है। ऐसे में कितने मुख्यमंत्रियों और लोगों से एनआरसी पर विमर्श किया गया और कितने लोग इसे अपने राज्यों में लागू करने को तैयार हैं।


मालूम हो कि बिहार के बक्सर निवासी प्रशांत की टीम ने 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चुनाव अभियान की कमान संभाली और चाय पर चर्चा की लोकप्रियता के साथ भाजपा को सत्ता में लाने के लिए चर्चित हुए। 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार को महागठबंधन के गठन के सहारे मुख्यमंत्री बनवाने की व्यूहरचना की। पंजाब के चुनावों में भी इन्होंने कांग्रेस के लिए काम किया। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में भी कांग्रेस की चुनावी रणनीति बनाई पर सफल नहीं हो सके।

आंध्रप्रदेश विधानसभा और लोकसभा चुनावों में प्रशांत किशोर ने वाईएसआर को सफलता दिलाने का श्रेय हासिल किया। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रियपात्र बने प्रशांत किशोर जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहते अभी पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी टीएमसी के लिए चुनावी रणनीति पर काम कर रहे हैं।