दिवाली के सीजन में गिफ्ट्स खरीदने पर भी इनकम टैक्स देना होगा। जी हां, दिवाली के मौके पर गिफ्ट्स लेने और देने का सिलसिला रहता है। मिठाई के डिब्बों के अलावा कई बार हम अपने परिवार वालों, रिश्तेदारों और दोस्तों को कुछ महंगे गिफ्ट्स भी देते हैं, जैसे कैश, ज्वेलरी या फिर कोई दूसरी महंगी चीजें। लेकिन गिफ्ट्स खरीदने से पहले या गिफ्ट लेने से पहले क्या आपने कभी सोचा है कि इस पर आपको टैक्स भी देना पड़ सकता है।

आपको बता दें कि अगर आपको किसी से गिफ्ट मिलता है तो वो आपकी पर्सनल इनकम में गिना जाएगा। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 56(2) के तहत इस गिफ्ट पर आपको टैक्स चुकाना भी पड़ सकता है और टैक्स में छूट भी मिल सकती है। कैश, प्रॉपर्टी, शेयर्स, सिक्योरिटीज, ज्वेलरी, पुरातात्विक संग्रह, कला, पेंटिंग्स, कलाकृतियां जैसी कीमती चीजें गिफ्ट में मिलती हैं तो इसे इनकम टैक्स एक्ट के तहत 'Income from Other Sources' माना जाता है, और इस आय का आपकी कुल में जोड़ दिया जाता है।

सरकार ने अप्रैल 1958 में Gift Tax Act बनाया था, जिसमें कुछ खास परिस्थितियों में गिफ्ट्स पर टैक्स लेना शुरू किया गया। इस एक्ट को अक्टूबर 1998 में खत्म कर दिया गया। लेकिन 2004 में सरकार ने वापस इसे इनकम टैक्स नियमों में शामिल कर लिया। वित्त वर्ष 2017-18 में जारी ITR नोटिफिकेशन में गिफ्ट्स का खुलासा करना टैक्सपेयर्स के लिए जरूरी कर दिया गया।

अगर आपने परिवार से बाहर किसी दोस्त या अनजान व्यक्ति को गिफ्ट दिया या फिर गिफ्ट लिया तो उसके लिए एक लिमिट तय है। अगर गिफ्ट की वैल्यू 50,000 रुपये तक है तो गिफ्ट लेने वाले और गिफ्ट देने वाले में से किसी को भी टैक्स नहीं देना होगा। लेकिन अगर गिफ्ट की कीमत 50,000  रुपये से ज्यादा है तो इस रकम को आपकी अन्य आय मानकर परी आय में जोड़ दिया जाएगा और फिर उस पर टैक्स वसूला जाएगा। ये गिफ्ट कैश के रूप में, ज्वेलरी, शेयर्स या सिक्योरिटीज के रूप में हो सकते हैं।

इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 56 (2) (x) के तहत रिश्तेदारों के बीच गिफ्ट्स को लेकर तस्वीर साफ की गई है। इसके मुताबिक अगर परिवारों के बीच में गिफ्ट लिया या दिया जाता है तो उस पर कोई टैक्स नहीं लगता है।

1. माता-पिता, भाई-बहन, बेटा-बेटी, चाचा-चाची जैसे तमाम रिश्तेदारों के बीच अगर गिफ्ट का लेन देने होता है तो कोई टैक्स नहीं लगता है।
2. रिश्तेदारों के बीच गिफ्ट के लेन-देन पर 50,000 की लिमिट नहीं लागू होती है, कोई जितना चाहे उतना गिफ्ट ले या दे सकता है।
3. विवाह समारोह में अगर गिफ्ट लिया और दिया जाता है तो उस पर भी कोई टैक्स नहीं लगता।
4. वसीयत के तौर पर मिलने वाले गिफ्ट पर भी कोई टैक्स नहीं लगता।
5. HUF का बंटवारा हुआ तो है इस पर टैक्स नहीं चुकाना होगा।