पांच दशक के लंबे सफर पर विराम लगाते हुए आखिरकार 26 अगस्त के दिन गुलाम नबी कांग्रेस से 'आजाद' हो ही गए। पार्टी के लिए इस झटके को सहन कर पाना मुश्किल था, लेकिन ये बस एक शुरुआत थी। जम्मू कश्मीर में 'आजाद' के पैठ इस कदर थी कि देखते ही देखते पूर्व उपमुख्यमंत्री, आठ पूर्व मंत्री, एक पूर्व सांसद, 9 विधायक, पंचायती राज संस्थान के सदस्य, नगर निगम पार्षद और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं ने इस्तीफों की झड़ी लगा दी। इस कड़ी में एक और नाम जुड़ा अशोक शर्मा का। शर्मा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शुमार थे और उन्होंने 1996 में राजौरी जिले के कालाकोट निर्वाचन क्षेत्र से विधानसभा चुनाव जीता था। पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे पत्र में शर्मा ने अपने फैसले को दर्दनाक बताया। 

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एक और बड़ा झटका देने की तैयारी में आजाद 

इस्तीफा देने के बाद आजाद के कदम एक नई पार्टी बनाने की तरफ बढ़ चुके हैं, जो कि जम्मू कश्मीर में कांग्रेस के लिए बड़ा खतरा बन सकती है, क्योंकि राज्य में साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसकी तैयारी में जुटे आजाद आज जम्मू की सैनिक कॉलोनी पहुंच गए हैं, जहां वे एक रैली करने वाले हैं। माना जा रहा है कि आजाद रैली के दौरान ही नई पार्टी का ऐलान कर सकते हैं। अब आजाद के पास जम्मू कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस, पीडीपी या फिर बीजेपी के साथ गठजोड़ करने का विकल्प है। हालांकि उनका कहना है कि भारतीय जनता पार्टी से गठबंधन न तो उनके लिए फायदेमंद है न ही BJP के लिए। 

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अब कांग्रेस भी एक्शन में

जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस बिखराव से जूझ रही है, ऐसे में पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त नेताओं पर एक्शन शुरु हो चुका है। कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर में अपने एक वरिष्ठ नेता को पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए निष्कासित कर दिया। प्रांतीय अध्यक्ष मंजीत सिंह का कहना है कि प्रांतीय सचिव फारूक अहमद ख्याल पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त थे, बार-बार अनुरोध करने के बावजूद पार्टी की आकांक्षाओं को पूरा करने में विफल रहे हैं, ऐसे में यह कदम उठाना पड़ा।